फर्जी निधि कंपनियों पर कार्रवाई के लिए बिहार ने केंद्र को लिखा पत्र

बिहार सरकार ने फर्जी तरीके से आमलोगों की जमा पूंजी लेकर चंपत होने वाली निधि कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) से किया है.

आरओसी ने भी माना बिहार में 323 डिफॉल्टर निधि कंपनियां,नोटिस किया गया है जारी संवाददाता,पटना बिहार सरकार ने फर्जी तरीके से आमलोगों की जमा पूंजी लेकर चंपत होने वाली निधि कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) से किया है.इसके लिए वित्त विभाग ने संबंधित मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखा है.विभाग ने अपने पत्र में लिखा है कि जनता की मेहनत की कमाई को खोने से बचाने के लिए इन अपंजीकृत निधि कंपनियों के खिलाफ तत्काल और निर्णायक कदम उठाया जाना जरूरी है. आए दिन अपंजीकृत निधि कंपनियां आमलोगों की जमा राशि लेकर भाग रही है. एसएलसीसी की बैठक में मुख्य सचिव ने दिये थे निर्देश : पिछले दिनों मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय को-र्डिनेशन कमेटी (एसएलसीसी) की बैठक फर्जी निधि कंपिनयों का मुद्दा उठाया गया था.मुख्य सचिव ने कहा था कि चूंकि निधि कंपनियां राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती हैं, इसलिए उचित कार्रवाई के लिए इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाना चाहिए.आरओसी-पटना को गैर-अधिसूचित निधि कंपनियों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए.नियम कानून का पालन नहीं करने वाली निधि कंपनियों का नाम हटा दिया जाना चाहिए.बैठक में कंपनी ऑफ रजिस्ट्रार पटना कार्यालय के प्रतिनिधि ने जानकारी दी कि राज्य की 323 डिफॉल्टर निधि कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जो ई-फॉर्म एनडीएच-4 जमा करने में विफल रहीं.इसके अलावा, इन कंपनियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए वित्त मंत्रालय में सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मांगी गई है. कई कंपनियों में पैसा जमा करना खतरे से खाली नहीं : निधि (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत निधि कंपनियों को एनडीएच-4 फॉर्म भरना अनिवार्य है ताकि यह पता चल सके कि वे केंद्र सरकार के नियम-कायदों का अक्षरश: पालन कर रही है या नहीं. यह एक तरह से घोषणापत्र है. इसमें कंपनी के सभी सदस्यों का नाम और पता रहता है. मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में पंजीकृत वैसी निधि कंपनियां जिन्होंने एनडीएच-4 फॉर्म नहीं भरा है, वे जमा नहीं ले सकती हैं.

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By RAKESH RANJAN

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