मातृभाषा के अलावा किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखने के लिए स्टूडेंट्स को करना होगा प्रोत्साहित

भारतीय भाषा के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया है. इसको लेकर यूजीसी ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किया है.

-यूजीसी ने जारी किया शिक्षण संस्थानों को निर्देश

संवाददाता, पटना

भारतीय भाषा के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया है. इसको लेकर यूजीसी ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किया है. इसको लेकर यूजीसी ने ‘लर्न वन मोर भारतीय भाषा’ पहल का प्रचार-प्रसार करने की अपील की है. इसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय को अपनी मातृभाषा के अलावा किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि देश में भाषायी विविधता और सांस्कृतिक एकता और मजबूत हो सके. यूजीसी ने कहा कि भारतीय भाषाओं की शब्दावली, व्याकरण, वाक्य संरचना और ध्वनि प्रणाली में काफी समानताएं होती हैं, इसलिए किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखना विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कठिन नहीं होगा.

व्यावहारिक क्षमता विकसित करने पर जोर

भारतीय भाषा समिति ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है, जिनके तहत नये भाषा पाठ्यक्रम शुरू किये जा सकेंगे. शिक्षण संस्थानों को कहा गया है कि इसका लक्ष्य भाषा में बोलने और पढ़ने-लिखने की व्यावहारिक क्षमता विकसित करने पर जोर देना है. स्नातक, स्नातकोत्तर, शोधार्थी व विशेष आवश्यकता वाले या सेक्टर-विशिष्ट भाषा चाहने वाले स्टूडेंट्स रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग का विकल्प भी उपलब्ध कराने को कहा है. कॉलेज अपने भाषा संसाधन टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो स्वयं विकसित कर सकेंगे. अन्य संस्थानों से सहयोग भी किया जा सकता है.

शिक्षण संस्थान ट्रेनर भी नियुक्त कर सकता है

यूजीसी ने कहा है कि संस्थान विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के प्रशिक्षक संस्थान के भीतर व बाहर से नियुक्त किये जा सकेंगे. टास्क-बेस्ड लैंग्वेज टीचिंग और सीएलआइएल जैसे प्रशिक्षण के लिए भी क्रेडेंशियल्स का भी प्रावधान किया गया है. भाषाई दक्षता हासिल करने पर माइक्रो-क्रेडेंशियल्स एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) में दर्ज होंगी. बेहतर प्रदर्शन वाले मेंटर्स को ‘एचइआइ लैंग्वेज मेंटर’ सर्टिफिकेट के लिए क्रेडिट्स दिये जायेंगे. यूजीसी ने कहा कि यह प्रयास देश के विविध भाषायी समूहों के बीच आपसी समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करेगा.

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Published by: Anurag pradhan

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