बारकोड और क्यूआर कोड होंगे अनिवार्य
बीएमएसआइसीएल का निर्देश, हर दवा पैक पर होगी ट्रैकिंग व्यवस्था
संवाददाता,पटना
बिहार में सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली दवाओं में फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा. राज्य सरकार ने दवाओं की सप्लाइ और गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) ने निर्देश जारी किया है कि सरकारी स्तर पर खरीदी जा रही हर दवा के पैकेट पर बारकोड या क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से छापा जायेगा. अब मरीजों और अस्पतालों को यह जानने के लिए किसी लैब की जरूरत नहीं होगी कि दवा असली है या नकली. एक मोबाइल स्कैन से ही सारी जानकारी सामने आ जायेगी. कॉरपोरेशन के अनुसार, सभी दवाओं के स्ट्रिप के चारों कोनों पर ऐसा कोड होना चाहिए, जो मोबाइल कैमरे से आसानी से स्कैन हो सके और पढ़ा जा सके. यही नहीं, कोड में दवा की एक्सपायरी डेट तक की जानकारी भी दर्ज होनी चाहिए. यदि किसी दवा के प्राइमरी पैक (जैसे बोतल, वायल या एंपुल) पर जगह नहीं हो, तो उसके सेकेंडरी पैकेजिंग पर कोड इस तरह प्रिंट किया जाये कि वह स्कैन करने पर साफ दिखायी दे. बारकोड का स्तर जीएस (ग्लोबल स्टैंडर्ड) के अनुरूप होना चाहिए, जिससे इसकी मान्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रहे. मालूम हो कि राज्य के सरकारी अस्पतालों के जीवनरक्षक दवाओं की सूची में 600 से अधिक प्रकार की दवाओं की खरीद का प्रावधान किया गया है. सरकारी अस्पतालों के ओपीडी और भर्ती होनेवाले मरीजों को ये दवाएं मुफ्त उपलब्ध करायी जाती हैं. इस पहल से अब दवाओं की पूरी ट्रैकिंग व्यवस्था आसान हो जायेगी. कहां से दवा आयी, कब बनी, कब खत्म होगी और किस बैच की है. यह सारी जानकारी अब एक स्कैन पर मिलेगी. ऐसे में मरीज भी मोबाइल से स्कैन करके इसकी पहचान कर सकेंगे. इससे नकली या एक्सपायर्ड दवाओं की आपूर्ति पर लगाम लगेगी.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
