'हसबैंड नेम में तेज प्रताप' की जानकारी रोहिणी आचार्य और परिवार को थी! क्या इसी वजह से चुनाव के वक्त RJD में नहीं हुई एंट्री?

Tej Pratap Yadav: मेडिकल रिपोर्ट में 'हसबैंड नेम' का खुलासा सामने आने के बाद तेज प्रताप यादव का निजी मामला अब सियासी बहस में बदल गया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यही वजह थी कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें आरजेडी में जगह नहीं मिल सकी.

Tej Pratap Yadav: आपको याद होगा कि विधानसभा चुनाव के दौरान तेज प्रताप यादव की चारों बहनें राबड़ी आवास से नाराज होकर बाहर निकल गई थीं. उस वक्त इसे पारिवारिक और राजनीतिक नाराजगी से जोड़कर देखा गया था. लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि कहीं इस नाराजगी की एक बड़ी वजह तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव से जुड़ा मामला तो नहीं था, जो अब खुलकर सामने आ रहा है.

भाई का घर बसता देखना चाहती थीं बहनें

परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि तेज प्रताप की सभी बहनें चाहती थीं कि उनके भाई का घर बसे. इसी वजह से वे उसके भविष्य को लेकर लगातार चिंतित रहती थीं. लेकिन “दूसरे खेमे” के कुछ लोग शायद तेज प्रताप को आगे बढ़ता नहीं देखना चाहते थे. यही वजह है कि परिवार के भीतर मतभेद गहराते चले गए.

रोहिणी आचार्य का रुख शुरू से साफ

परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, रोहिणी आचार्य शुरू से चाहती थीं कि तेज प्रताप यादव की पुरानी गलतियों को माफ कर उन्हें दोबारा राष्ट्रीय जनता दल में शामिल किया जाए. चुनाव का समय था, मौका भी था और राजनीतिक तौर पर दस्तूर भी. लालू परिवार के कई करीबी मान रहे थे कि “फोटो कांड” के बाद तेज प्रताप की आरजेडी में वापसी तय है.

फिर क्यों नहीं मिली आरजेडी में जगह?

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. न तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इसकी इजाजत दी और न ही तेज प्रताप यादव ने खुद आगे कदम बढ़ाया. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अनुष्का यादव की मेडिकल रिपोर्ट में “हसबैंड नेम” के कॉलम में तेज प्रताप यादव का नाम दर्ज होने की जानकारी पहले से परिवार को थी?

क्या यही बनी बड़ी बाधा?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी वजह से, सभी बहनों के दबाव के बावजूद, तेज प्रताप यादव को विधानसभा चुनाव के दौरान आरजेडी में एंट्री नहीं मिल सकी. हालांकि परिवार के करीबी सूत्र यह भी कहते हैं कि इस मामले की पूरी जानकारी सभी को नहीं थी.

कई सवाल, जवाब भविष्य में

अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. तेज प्रताप यादव के दावों में कितनी सच्चाई है? अनुष्का यादव के बच्चे का पिता कौन है? और राजद परिवार के भीतर असल में क्या चल रहा है? फिलहाल बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार में जो कुछ हो रहा है, वह किसी टीवी सीरियल की कहानी से कम नहीं लग रहा.

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लेखक के बारे में

By Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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