Bihar Ayurveda University : बिहार में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग उठी है. विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवादित्य ठाकुर ने शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी राज्य में एक भी आयुर्वेद विश्वविद्यालय नहीं है. उन्होंने आयुर्वेद की पढ़ाई और चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना को जरूरी बताया.
तीन राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों के बंद होने का दावा
शिवादित्य ठाकुर ने कहा कि बिहार में पांच राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय हैं. उनके अनुसार भागलपुर, दरभंगा और बक्सर के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय वर्षों से बंद हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान में पटना और बेगूसराय के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं.
आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग
ठाकुर ने केंद्र और राज्य सरकार से आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को मजबूत करने के लिए शिक्षा, शोध और चिकित्सा व्यवस्था के स्तर पर व्यापक प्रयास की जरूरत है.
आयुर्वेद को बताया जीवन जीने का विज्ञान
विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन जीने का विज्ञान भी है. उनके अनुसार आयुर्वेद के मनीषियों ने ज्ञान, तथ्यों, अनुसंधान और तर्क के आधार पर इस चिकित्सा पद्धति को विकसित किया.
कुम्हरार में विकसित होगा आरोग्य विहार
परिषद के संरक्षक शिव मंगल मिश्र ने बताया कि कुम्हरार परिसर स्थित आरोग्य विहार को औषधीय पौधों से विकसित करने की योजना है. उन्होंने कहा कि धंवतरि द्वारा संचालित आरोग्य विहार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से विकसित किया जाएगा.
पर्यटकों को औषधीय पौधों की मिलेगी जानकारी
योजना के तहत आरोग्य विहार परिसर में प्राचीन चिकित्सा पद्धति में उपयोगी औषधीय पौधों को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य पर्यटकों और आम लोगों को इन पौधों तथा आयुर्वेद में उनके महत्व से परिचित कराना है.
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