Drug addiction Children in Khagaul : पटना के खगौल में छोटे बच्चों और किशोरों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का कारण बनती जा रही है. स्थानीय स्तर पर सामने आ रही तस्वीर के अनुसार कुछ बच्चे नशे के लिए पैसे जुटाने को छोटे-मोटे काम करने से लेकर कबाड़ बेचने तक के तरीके अपना रहे हैं. स्टेशन और आसपास के इलाकों में ऐसे बच्चों की मौजूदगी भी लोगों का ध्यान खींच रही है. अभिभावकों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है.
छोटे बच्चों तक पहुंची नशे की लत
खगौल में नशे की समस्या अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आ रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार छोटे बच्चे और किशोर भी सूखे नशे की चपेट में आते जा रहे हैं. यह स्थिति अभिभावकों और समाज के लिए चिंता का विषय बन गई है.
नशे के लिए खुद जुटा रहे पैसे
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार कुछ बच्चे नशे की जरूरत पूरी करने के लिए खुद पैसे जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए वे अलग-अलग छोटे-मोटे काम करते हैं. कुछ बच्चे स्टेशन के आसपास चाय दुकानों पर बर्तन धोने और यात्रियों का सामान उठाने जैसे काम करते देखे जाने की बात कही जा रही है.
कबाड़ बेचकर पैसे जुटाने का आरोप
स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ बच्चे निर्माणाधीन या जर्जर मकानों तथा टूटे नालों के स्लैब से लोहे की छड़ निकालकर उसे आसपास के कबाड़ियों को बेच देते हैं. इस तरह मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल नशा खरीदने में किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, इस तरह की गतिविधियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
स्टेशन पर छोटे-मोटे काम भी कर रहे बच्चे
स्टेशन के आसपास कुछ बच्चे यात्रियों का सामान उठाने और चाय दुकानों पर काम करने जैसे छोटे काम करते हैं. स्थानीय जानकारी के अनुसार ऑटो में यात्रियों का सामान रखने के बदले कुछ बच्चों को चालक से 100 से 200 रुपये तक मिल जाते हैं. इन कामों से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल नशे के लिए किए जाने की बात कही गई है.
एक किशोरी को सिगरेट खरीदते देख लोग हुए हैरान
शनिवार की दोपहर स्टेशन के स्कूलेटिंग एरिया में एक चाय दुकान पर काम करने के बाद एक किशोरी के सिगरेट खरीदने की घटना ने आसपास मौजूद लोगों का ध्यान खींचा. लोगों के रोकने पर उसके वहां से भागने और कथित तौर पर धमकी देने की बात भी सामने आई है. घटना ने बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी.
बाजार में आसानी से उपलब्धता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ सामान मेडिकल स्टोर, स्टेशनरी, किराना, पान दुकानों समेत अलग-अलग जगहों पर आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. इससे बच्चों की पहुंच ऐसे पदार्थों तक होने की आशंका बढ़ जाती है. हालांकि, किन दुकानों पर कौन सा पदार्थ अवैध रूप से बेचा जा रहा है, इसकी पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकती है.
नशे की आदत से पढ़ाई पर पड़ रहा असर
अभिभावकों और स्थानीय लोगों की चिंता केवल नशे तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि यदि कम उम्र में बच्चों को नशे की आदत लगती है, तो इसका असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है. नशे की लत बढ़ने पर किशोर अपराध और असामाजिक गतिविधियों की ओर भी जा सकते हैं.
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
बच्चों और किशोरों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर अभिभावकों और बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि नशे की बिक्री पर निगरानी बढ़ाने के साथ बच्चों की काउंसिलिंग और जागरूकता पर भी जोर दिया जाना चाहिए.
सिर्फ कार्रवाई नहीं, बच्चों की निगरानी भी जरूरी
नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल दुकानों और बिक्री पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी. परिवार, स्कूल, स्थानीय प्रशासन और समाज को मिलकर बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना होगा. समय रहते बच्चों को नशे से दूर करने के लिए परामर्श और पुनर्वास जैसे कदम भी जरूरी हैं.
Also Read : पटना : फतुहा में टेम्पो से गिरा 30 वर्षीय युवक, आधार कार्ड पर गुजरात का पता, जांच में जुटी पुलिस
