संवाददाता,पटना
ग्रामीण बैंक में भारत सरकार का 50 फीसदी, प्रायोजक बैंक का 35 फीसदी तथा राज्य सरकार का 15 फीसदी शेयर है. केंद्र सरकार अपने हिस्से का 34 फीसदी तक शेयर का विनिवेश करना चाहती है. हालांकि, इसका प्रयास केंद्र सरकार 2015 से करती रही है, लेकिन ग्रामीण बैंक की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण अबतक आइपीओ जारी नहीं हो सका था.इसके बाद ग्रामीण बैंकों को मजबूत करने के लिए ग्रामीण बैंक का विलय कर एक राज्य, एक ग्रामीण बैंक का विकल्प चुना गया.पहली मई से पूरे देश के साथ-साथ बिहार के दोनों ग्रामीण बैंकों का विलय हो गया.विलय होते ही केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा सभी प्रायोजक बैंक को आइपीओ जारी करने का निर्देश दिया है.
यूनियंस को ग्रामीण बैंकों के निजीकरण की आशंका: ग्रामीण बैंकों के निजीकरण की आशंका को लेकर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक और दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक के यूनियंस की संयुक्त बैठक एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में हुई.कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ ग्रामीण बैंक यूनियंस के महासचिव डीएन त्रिवेदी ने कहा कि प्रस्ताव आइपीओ जारी कर सरकार ग्रामीण बैंक का निजीकरण करना चाहती है.इसका राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिकार किया जायेगा.संयुक्त सभा को बिहार प्रोविन्सीयल बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के अनिरुद्ध कुमार, एआइबीओए के अरविंद, मो नदीम अख्तर, नीरज चौधरी, राजीव प्रकाश व कुंदन राय ने संबोधित किया.बैठक की अध्यक्षता प्रदीप कुमार मिश्र और ब्रह्मेश्वर कुमार ने की.
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