पांच सीटों के लिए घमासान, एनडीए के पास बहुमत, मगर पांचवीं सीट पर एआईएमआईएम ने फंसाया पेंच

Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है. एआईएमआईएम ने साफ कर दिया है कि वह किसी गठबंधन को समर्थन नहीं देगी, बल्कि खुद का उम्मीदवार उतारेगी. इससे एनडीए और महागठबंधन दोनों तरफ की चिंता बढ़ गई है.

Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होने वाला है. एनडीए और महागठबंधन दोनों अपने-अपने हिसाब से जोड़-घटाव में लगे हैं. इसी बीच एआईएमआईएम ने खेल और रोचक बना दिया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी किसी को समर्थन नहीं देगी, बल्कि खुद का उम्मीदवार उतारेगी.

क्या बोले ईमान

अख्तरुल ईमान ने कहा कि हर बार उनसे यह क्यों पूछा जाता है कि वे किसे समर्थन देंगे. उन्होंने सवाल उठाया कि कोई यह क्यों नहीं पूछता कि उन्हें कौन समर्थन देगा. उनका कहना है कि राज्यसभा में कई दलों के सांसद हैं, लेकिन एआईएमआईएम का कोई प्रतिनिधि नहीं है. ऐसे में पार्टी अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है.

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ हैं और दलितों व पिछड़ों की आवाज मजबूत करना चाहते हैं, उन्हें एआईएमआईएम का साथ देना चाहिए. उनका इशारा साफ था कि पार्टी अब सिर्फ समर्थन देने वाली भूमिका में नहीं रहना चाहती.

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क्या है गणित

अब जरा विधानसभा का गणित समझ लेते हैं. बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. एनडीए के पास फिलहाल 202 विधायक हैं. इस हिसाब से वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है. चार सीटों के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचेंगे, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे दूसरे दलों या निर्दलीय विधायकों का सहारा लेना पड़ सकता है.

दूसरी तरफ महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं. यानी उसे एक सीट जीतने के लिए भी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा. ऐसे में एआईएमआईएम के पांच विधायक और बसपा का एक विधायक काफी अहम हो जाते हैं. ये विधायक फिलहाल किसी गठबंधन में नहीं हैं, इसलिए इनका रुख चुनाव का नतीजा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. अब देखना है कि पांचवीं सीट पर किसका पलड़ा भारी पड़ता है.

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Published by: Paritosh Shahi

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