Bihar New University Act: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाने के लिए एक नया कानून लाया जाएगा. यह नया कानून दूसरे राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सबसे बेहतरीन प्रणालियों पर आधारित होगा. पटना के लोक भवन में शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सय्यद अता हसनैन की अध्यक्षता में हुई एक हाईलेवल बैठक में इस पर सहमति बनी. लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर भी मौजूद रहे. बैठक में यूनिवर्सिटी के पठन-पाठन, एडमिशन, बहाली, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए कई अहम फैसले लिए गए.
211 नए कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की संविदा पर बहाली
इस बैठक में रोजगार और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर भी बड़ा निर्णय हुआ है. बिहार में खुले 211 नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की जाएगी. यह नियुक्तियां केंद्रीयकृत तरीके से कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर की जाएंगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में ऐसी मजबूत व्यवस्था बनाई जाए जिससे बिहार के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े.
30 सितंबर तक की डेडलाइन
यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि अब डिग्री मिलने में होने वाली देरी को हमेशा के लिए खत्म किया जा रहा है. इसके लिए मिशन मोड में काम शुरू हो चुका है. बैठक में जानकारी दी गई कि विद्यार्थियों की सभी पेंडिंग डिग्रियों का वितरण हर हाल में 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. इसके साथ ही राज्यपाल ने आदेश दिया कि 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालय समर्थ पोर्टल के सभी 26 मॉड्युल्स को पूरी तरह से लागू कर दिया जाए.
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जून महीने में ही होंगे जनरल ट्रांसफर
प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों के ट्रांसफर और प्रमोशन के लिए एक समय-सीमा तय कर दी गई है. अब सामान्य ट्रांसफर सिर्फ जून के महीने में ही किए जा सकेंगे. जून के अलावा किसी अन्य महीने में ट्रांसफर तभी होगा जब कोई बेहद जरूरी स्थिति हो और इसके लिए राज्यपाल से पहले मंजूरी लेना अनिवार्य होगा.
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