नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, बिहार के 24 जिलों में शुरू हुआ महाभियान

Bihar Government: बिहार सरकार ग्रामीण इलाकों में यातायात को टिकाऊ बनाने के लिए बड़े स्तर पर सड़क निर्माण करा रही है. सुलभ संपर्कता योजना के तहत पंचायतों और प्रशासनिक संस्थानों को मेन रूट से जोड़ा जाएगा. 2025-26 में 72 योजनाओं को मंजूरी मिली है.

Bihar Government: बिहार के ग्रामीण इलाकों में आवागमन आसान करने के मकसद से राज्य सरकार ने एक अभियान शुरू किया है. इसके तहत पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर के प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों को बारहमासी ग्रामीण सड़कों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है. इस पहल का मकसद ग्रामीण आबादी को अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, हाट-बाजार, बैंक और पर्यटन स्थलों तक आसान और सुरक्षित पहुंच उपलब्ध कराना है.

कनेक्टिविटी बेहतर बनाना मकसद

सरकार की इस योजना का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों के महत्वपूर्ण जगहों को वैकल्पिक रूट से जोड़कर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है. 2025-26 के दौरान इस योजना के लिए कुल 72 सड़क परियोजनाओं का चयन किया गया है. इनमें से 65 को मंजूरी भी दी जा चुकी है. इन सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग से जोड़ा जाएगा. इससे ग्रामीण क्षेत्रों का सीधा संपर्क मुख्य परिवहन नेटवर्क से हो सकेगा.

विभाग ने क्या जानकारी दी

ग्रामीण कार्य विभाग ने बताया कि अब तक चयनित सभी 72 योजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है और इन पर 515 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी. इनमें से 13 परियोजनाओं पर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है. सुलभ संपर्कता योजना के तहत राज्य के 24 जिलों में कुल 254.40 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण होना है.

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किस जिले को सबसे ज्यादा लाभ

परियोजनाओं की संख्या के लिहाज से राजधानी पटना को सबसे अधिक लाभ मिला है. यहां 20 योजनाओं के तहत 25.115 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी. लखीसराय में 14, नालंदा में 7, जहानाबाद में 6 और समस्तीपुर में 5 योजनाओं को मंजूरी मिली है. इसके अलावा पश्चिमी चंपारण और बांका में तीन-तीन, भोजपुर, गया, कटिहार और गोपालगंज में दो-दो तथा सारण, सासाराम, औरंगाबाद, अरवल, शेखपुरा, बेगूसराय और पूर्वी चंपारण में एक-एक योजना को स्वीकृति दी गई है.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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