Bihar Energy Infrastructure: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 के मंच पर ‘फोकस स्टेट’ के रूप में बिहार ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य अब ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का एक उभरता हुआ और भरोसेमंद केंद्र बन चुका है. समिट के दौरान बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले 20 वर्षों में हुए ऐतिहासिक बदलावों को उजागर किया गया.
81,000 करोड़ रुपए किए जायेंगे इंवेस्ट
बिहार ने ऊर्जा सेवाओं के विस्तार में काफी प्रगति की है और इस सफलता को वैश्विक मंच पर भी सराहा गया. बिहार सरकार ने अगले पांच सालों में राज्य की ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 81,000 करोड़ रुपए के निवेश की योजना बनाई है.
इस योजना के तहत 38950 करोड़ रुपए पावर जनरेशन की ओर लगाए जायेंगे. 16194 करोड़ ट्रांसमिशन को मजबूत करने के लिए लगाए जायेंगे और 22951 करोड़ डिस्ट्रीब्यूशन सुदृढ़ करने के लिए लगाए जायेंगे. इसके अलावा मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के मेंटेनेंस और रख-रखाव के लिए 3346 करोड़ रुपए लगाए जायेंगे.
रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर टारगेट सेट
जानकारी के मुताबिक, रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत बिहार ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और 6.1 गीगावाट एनर्जी स्टोरेज कैपेसिटी विकसित करने का लक्ष्य रखा है. निवेशकों के लिए ट्रांसमिशन शुल्क में छूट, ऊर्जा बैंकिंग, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और कार्बन क्रेडिट जैसे प्रावधान राज्य को एक आकर्षक निवेश गंतव्य बना रहे हैं.
समिट में और क्या-क्या दिखाया गया?
समिट के दौरान 20 साल की यात्रा दिखी. बिहार ने पिछले 20 सालों में बिजली क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार का भी प्रदर्शन किया. 2005 में जहां राज्य को 700 मेगावाट बिजली मिलती थी, अब राज्य की बिजली मांग 8,700 मेगावाट से अधिक है. 2.2 करोड़ उपभोक्ता बिजली नेटवर्क से जुड़े हैं. वितरण कंपनियां 2021 के 1,942 करोड़ घाटे से 2025 में 2,000 करोड़ रुपये के लाभ में पहुंची है.
Also Read: बिहार में फिर वंदे भारत एक्सप्रेस पर चले पत्थर, टूटा खिड़की का शीशा, CCTV खंगाल रही पुलिस
