Bihar Electricity Bill: बिहार में लोगों पर बिजली बिल का बोझ बढ़ सकता है. 1 अप्रैल 2026 से बिजली की नई दरें लागू हो सकती हैं. बिहार विद्युत विनियामक आयोग को राज्य की दोनों बिजली कंपनियों (साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन) की तरफ से टैरिफ प्रस्ताव भेजा गया है. इसके साथ ही बिजली के रेट में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं.
क्यों बढ़ाई जायेगी बिजली की दरें?
बिजली की दरों में बढ़ोतरी को लेकर यह वजह बताई जा रही है कि बिजली बोर्ड के जमाने का 3200 करोड़ रुपए का बकाया है. बिजली कंपनी के अधिकारियों की माने तो, साल 2012 में बिजली बोर्ड से कंपनी के गठन के दौरान एसेट लायबिलिटि के लिए 1100 करोड़ रुपए देना था. इसके अलावा भी अन्य बकाया राशि है, जिसे मिलाकर टोटल 3200 करोड़ रुपए वसूली का फैसला दिया गया.
अब इसकी भरपाई के लिए लगभग 35 पैसा प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है. जानकारी के मुताबिक, आयोग की तरफ से सुनवाई पूरी कर ली गई है. अगर सरकार बकाया राशि का भुगतान नहीं करती है तो बिजली के रेट में बढ़ोतरी हो सकती है. नया रेट 1 अप्रैल 2026 से ही लागू हो जाएगा और 1 अप्रैल 2027 तक जारी रहेगा.
सरकार ने उठाया था जिम्मा
पूरे मामले को लेकर बताया गया कि साल 2012 में ही बिजली बोर्ड का बंटवारा किया गया था और कंपनियां बनाई गईं थी. उस वक्त बंटवारे के दौरान बोर्ड का बकाया भुगतान करने की जिम्मेदारी सरकार ने अपने ऊपर ली थी. लेकिन अब तक सरकार ने राशि नहीं दी है. ऐसे में कंपनियों ने इसकी भरपाई की मांग की है. आयोग की तरफ से अगर बिजली कंपनियों की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी जाती है तो, रेट में बढ़ोतरी हो जाएगी.
सरकार की क्या है भूमिका?
बिजली की दरों को बढ़ने और घटने में सरकार की बेहद खास भूमिका होती है. दरअसल, बिजली की दरों को बिहार विद्युत विनियामक आयोग की ओर से तय किया जाता है. पूरे खर्च को लेकर जानकारी सरकार को दी जाती है और सरकार अनुदान देकर दर को कम करती है.
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