पटना : एक माह में धंसी 10 लाख से बनी सामुदायिक भवन की छत, ग्रामीणों ने उठाया सवाल तो एक्शन में आए BDO

Barh Community Center Roof Collapses : पटना जिले के बाढ़ प्रखंड में करीब एक महीने पहले बने 10 लाख रुपये के सामुदायिक भवन की छत धंस गई. ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं. बीडीओ ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

Barh Community Center Roof Collapses : पटना जिले के बाढ़ प्रखंड अंतर्गत बराह पंचायत के हसपुरा गांव में करीब एक माह पहले बने सामुदायिक भवन की छत धंसने का मामला सामने आया है. वार्ड नंबर-11 स्थित अनुसूचित जाति टोला में करीब 10 लाख रुपये की लागत से बने भवन की छत लगभग एक फीट नीचे बैठ गई. घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. बीडीओ ने मामले की जांच और दोषी मिलने पर कार्रवाई की बात कही है.

करीब एक माह पहले बना था सामुदायिक भवन

बराह पंचायत के हसपुरा गांव के वार्ड नंबर-11 स्थित अनुसूचित जाति टोला में करीब 10 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था. ग्रामीणों के मुताबिक, भवन को बने अभी करीब एक माह ही हुआ था कि इसकी छत धंसने लगी. ग्रामीणों का कहना है कि छत करीब एक फीट तक नीचे बैठ गई है. इतनी कम अवधि में छत के धंसने से भवन की मजबूती और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर ग्रामीणों को आशंका

छत धंसने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि भवन के निर्माण में किसी स्तर पर लापरवाही हुई हो सकती है. ग्रामीणों के अनुसार, इतनी जल्दी छत का नीचे बैठना सामान्य नहीं माना जा सकता. इसलिए पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच कराने की मांग उठ रही है.

छत की ढलाई के दौरान अभियंता के नहीं रहने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सामुदायिक भवन की छत की ढलाई के दौरान संबंधित अभियंता मौके पर मौजूद नहीं थे. इससे निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सेवक के अभिकर्ता होने के कारण निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए.

क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण की बात

ग्रामीणों के मुताबिक, मुखिया प्रतिनिधि की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण कराने की बात कही गई है. हालांकि, इसके बाद एक अहम सवाल खड़ा हो गया है कि दोबारा निर्माण का खर्च किस मद से किया जाएगा.

ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि अगर भवन में दोबारा काम कराया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और निर्माण में हुई कथित कमी के लिए जवाबदेही कैसे तय की जाएगी.

बीडीओ ने कहा- मामला संज्ञान में, दोषी पर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर बीडीओ प्रशांत प्रसून ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है. उन्होंने स्थल का निरीक्षण भी किया है. बीडीओ के अनुसार, संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

जांच के बाद साफ होगी निर्माण में लापरवाही की स्थिति

फिलहाल सामुदायिक भवन की छत धंसने के वास्तविक कारण की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी. ग्रामीणों की ओर से निर्माण सामग्री, ढलाई और निगरानी व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जानी है.

सबसे अहम सवाल यही है कि करीब 10 लाख रुपये की लागत से तैयार भवन की छत इतनी कम अवधि में क्यों धंसी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है. प्रशासन की जांच के बाद ही इन सवालों का जवाब सामने आएगा.

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By साक्षी कुमारी

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