बांग्लादेशी-नेपाली भी कैंसर की फ्री दवा ले रहे

बांग्लादेशी नागरिक और नेपाल के नागरिक मुफ्त में कैंसर का इलाज कराने बिहार पहुंच रहे हैं. ये मरीज डे-केयर कैंसर सेंटर में न सिर्फ मुफ्त परामर्श लेने में सफल हो रहे हैं, बल्कि कैंसर इलाज में उपयोग में आनेवाली महंगी कीमोथेरेपी की दवा मुफ्त में लेने में भी सफल हो रहे हैं.

अधिकारियों ने कहा, ऐसे नागरिकों की पहचान आसान नहीं है संवाददाता, पटना बांग्लादेशी नागरिक और नेपाल के नागरिक मुफ्त में कैंसर का इलाज कराने बिहार पहुंच रहे हैं. ये मरीज डे-केयर कैंसर सेंटर में न सिर्फ मुफ्त परामर्श लेने में सफल हो रहे हैं, बल्कि कैंसर इलाज में उपयोग में आनेवाली महंगी कीमोथेरेपी की दवा मुफ्त में लेने में भी सफल हो रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे नागरिकों की पहचान आसान नहीं है. ऐसे लोग बिहार का स्थानीय पता पर आधार नंबर तैयार करा लेते हैं. ऐसे में उनको दवा दी जा रही है. बिहार सरकार द्वारा अपने राज्य के नागरिकों को मुफ्त इलाज की हर प्रकार की सुविधाएं दी जा रही है. इसी में कैंसर जैसे मरीजों को भी इलाज के लिए मुफ्त में कैंसर की दवाएं दी जाती हैं. सूत्रों की माने तो कैंसर की मुफ्त दवा का लाभ बांग्लादेशी, नेपाली नागरिक और दूसरे राज्य के मरीज भी उठा ले रहे हैं. उनका कहना है कि किशनगंज में बांग्लादेशी नागरिक , तो दरभंगा जिले में नेपाल के कैंसर रोगी बिहार सरकार के कैंसर की मुफ्त दवा से इलाज करा ले रहे हैं. मुफ्त दवा को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधार नंबर होना अनिवार्य किया गया है, जिससे उनका निवास स्थान का पता चल सके, पर स्थानीय स्तर पर वे अपने गलत पता से आधार नंबर भी बना ले रहे हैं. इसकी पकड़ डे-केयर सेंटर पर बैठे चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं होती है. वे सिर्फ आधार नंबर के आधार पर मुफ्त दवा दे देते हैं. डे-केयर सेंटर पर पूरी कोशिश होती है कि बिहार से बाहर के मरीजों को मुफ्त दवा नहीं दी जाये, पर सिस्टम फूलप्रूव नहीं होने से इसका लाभ बाहरी लोग उठा रहे हैं. ऐसे मरीजों के इलाज में स्थानीय स्तर के नागरिकों का भी सहयोग मिल रहा है. इतना ही नहीं बिहार में कई ऐसे चिकित्सक हैं जो बिहार के बाहर के मरीजों का अपने प्राइवेट क्लीनिक में इलाज करते हैं और उनको मुफ्त दवा के लिए ऐसे डे-केयर सेंटर पर लाकर मुफ्त दवा उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं. यह ऐसी प्रक्रिया है जिसका आसानी से पता लगाना मुश्किल है.

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Author: RAKESH RANJAN

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