सीसीटीएन में बिहार पिछड़ा
पटना : अगले एक साल में राज्य के सभी पुलिस थाने में आॅनलाइन एफआइआर दर्ज होने लगेगी. कंप्यूटर और इंटरनेट के सहारे न सिर्फ प्राथमिकी दर्ज होगी बल्कि इसकी पावती रसीद भी एफआइआर करानेवालों को मिल सकेगी. इसके लिए पुलिस पदाधिकारियों को ट्रेनिंग दी जायेगी. आॅनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने के मामले में बिहार दूसरे राज्यों से पीछे चल रहा है. लेकिन, सरकार के सजग होने से क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क (सीसीटीएन) का विशाल जाल एक साल में तैयार कर लिया जायेगा. फिलहाल एक महीने के भीतर यह व्यवस्था हो रही है कि लोग इंटरनेट के माध्यम से पुलिस थाने में दर्ज एफआइआर को आॅनलाइन देख पायेंगे.
बिहार समेत देश के सभी थानों को इस योजना से जोड़ने के लिए वर्ष 2015-16 तक की समयसीमा तय की गयी थी. बिहार और राजस्थान को छोड़कर अन्य सभी राज्यों के थाने इस नेटवर्क में शामिल हो गये हैं. राष्ट्रीय स्तर पर सीसीटीएन का 94 फीसदी काम पूरा हो चुका है. सिर्फ बिहार और राजस्थान में नेटवर्क तैयार नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर छह फीसदी काम बचा हुआ है.
बिहार में इसे तैयार करने के लिए पुलिस महकमा ने बड़े स्तर पर कवायद शुरू कर दी है. इसके तहत सभी थानों में कंप्यूटर समेत अन्य जरूरी हार्डवेयर लगाने और इससे जुड़ी वायरिंग करने के लिए जल्द ही टेंडर निकलने जा रहा है. इस टेंडर प्रक्रिया में जिस कंपनी
का चयन होगा, उसे सीसीटीएन से संबंधित सभी नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेवारी दी जायेगी. इससे पहले भी पुलिस महकमा ने इसे लेकर टेंडर किया था, लेकिन किसी कंपनी का चयन नहीं हो सका.
पहला टेंडर फेल होने के बाद दूसरी बार फिर से टेंडर किया जा रहा है. फिर भी इसे तैयार होने में करीब एक वर्ष का समय लगने की संभावना है. नेटवर्क तैयार करने का काम शुरू होने के साथ ही सभी स्तर के पुलिसकर्मियों को इसे लेकर ट्रेनिंग देने की प्रक्रिया भी शुरू हो जायेगी. इन्हें ट्रेनिंग इसलिए दी जायेगी, ताकि वे इसमें मौजूद सभी तरह की सुविधाओं का उपयोग कर सकें. साथ ही बेहतर पुलिसिंग की अवधारणा को सशक्त तरीके से लागू करने में इसकी मदद ले सकें.
विकल्प भी किया जा रहा तैयार : जब तक सीसीटीएन राज्य में तैयार नहीं हो जाता तब तक पुलिस महकमा राज्य के सभी थानों में होने वाली एफआइआर को ऑनलाइन देखने की व्यवस्था करने में जुटा हुआ है. सभी थानों में होने वाली एफआइआर की कॉपी ‘पीडीएफ फॉरमेट’ में ऑनलाइन देख सकते हैं. इसके लिए तैयारी शुरू हो गयी है. इसके साथ ही सीसीटीएन का काम भी चलता रहेगा. जैसे ही यह तैयार होगा, दोनों को मर्ज कर दिया जायेगा.
पटना. सरकारी कामकाज में सूचना प्रौद्योगिकी की तेजी से बढ़ती दखलअंदाजी और निर्भरता के कारण साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरती जा रही है. राज्य सरकार के सभी विभाग, निगम और अन्य सभी प्रमुख योजनाओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसे आसानी से कोई भी प्राप्त कर लेता है. साइबर वर्ल्ड में मौजूद इन सभी जानकारियों को सुरक्षित बनाये रखने के लिए राज्य सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है.
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग इसके लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के साथ मिलकर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रहा है. इसके तहत सभी सरकारी विभागों, निगम और निकायों की वेबसाइट को एक ही सर्वर से संचालित, मेंटेनेंस और मॉनीटरिंग करने की व्यवस्था की जा रही है. इसके लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में एक वृहद सर्वर नेटवर्क तैयार किया जा रहा है. जल्द ही इससे संबंधित टेंडर होने जा रहा है. इस नयी व्यवस्था में सभी विभागों के पास इसके राइट्स होंगे.
