पटना : राज्य के पटना समेत भागलपुर, मुंगेर और तिरहुत प्रमंडल में शिक्षा उपनिदेशक और 17 जिले में जिला शिक्षा पदाधिकारी के पद खाली हैं. सभी जगहों पर प्रभार से काम चलाया जा रहा है.
प्रभार की व्यवस्था के चलते स्कूलों की निगरानी ठीक तरह से नहीं हो रही है. शिक्षकों की समस्याओं का भी निदान नहीं हो पा रहा और छात्रों की कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में भी दिक्कत आती है. अधिकारियों की कमी से पटना सहित चार प्रमंडलों में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक का पद प्रभार में चल रहा है. 17 जिले में जिला शिक्षा पदाधिकारी का पद भी प्रभार में चल रहा है. सभी जगह जिला प्रोग्राम पदाधिकारी डीपीओ ही जिला शिक्षा पदाधिकारी का काम संभाल रहे हैं. प्रभार की व्यवस्था के चलते स्कूलों की सतत निगरानी नहीं हो पा रही है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए समय-समय पर स्कूलों की निगरानी आवश्यक है.
अधिकारियों पर पहले से ही काम का अधिक बोझ है. विभाग में प्रभार वाले पदों पर नियुक्ति पर मंथन चल रहा है, ताकि बच्चों से सबंधित योजनाओं का कार्यान्वयन ठीक तरह से हो. मिड डे मील, साइकिल व पोशाक तथा छात्रवृत्ति विभाग की बड़ी योजना है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति को 80 से 85 फीसदी तक करने का सुझाव भी दिया है. शिक्षा विभाग में अधिकारियों की कमी के चलते इस लक्ष्य को हासिल करने में काफी परेशानी होती है.
