शशिभूषण कुंवर,पटना नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) द्वारा वर्ष 2022 सत्र से एमबीबीएस विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ही परिवारों को गोद लेने का कार्यक्रम आरंभ किया है. देश के 496 मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों द्वारा परिवारों को गोद लेकर उनके सेहत की निरंतर जांच की गयी. साथ ही कैंप का भी आयोजन किया गया. इस प्रकार की गतिविधियों में बिहार के 15 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के कुल 1752 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभायी. अब एनएमसी ने इसकी पहली रिपोर्ट जारी की है. इसमें चौंकानेवाले परिणाम प्राप्त हुए हैं. पढ़ाई के साथ परिवारों को गोद लेने का कार्यक्रम शुरू हुआ है एनएमसी द्वारा जारी पहली रिपोर्ट के अनुसार पाया गया है कि गोद लिये जानेवाले परिवारों में 17 प्रतिशत लोग ब्लडप्रेशर की बीमारी से पीड़ित हैं , जबकि 14 प्रतिशत में डाइबिटिज की शिकायत पायी गयी है. इसके अलावा 15.6 प्रतिशत बच्चों में बौनापन की शिकायत सामने आयी है. इसी तरह से 31 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) पायी गयी. साथ ही 38 प्रतिशत महिलाएं भी एनीमिक पायी गयीं. गर्भवती महिलाओं में 39 प्रतिशत में खून की कमी, जबकि 19 प्रतिशत पुरुष भी खून की कमी के शिकार पाये गये हैं. एनएमसी द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में 2022 में कुल 19 मेडिकल कॉलेज थे, जिनमें 15 मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया. राज्य में उस समय कुल एमबीबीएस की 1997 सीटें आवंटित थीं, जिसमें 1752 विद्यार्थियों ने भाग लिया. बिहार के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के 82 मेडिसिन विभाग के फैकल्टी ने ,जबकि 43 दूसरे विभाग के फैकल्टी ने भाग लिया है. जिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल और उनके विद्यार्थियों ने भाग लिया , उनमें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, एनएमसीएच,पटना, आइजीआइएमएस, पटना, एएनएमसीएच,गया, एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर, विम्स पावापुरी, डीएमसीएच, दरभंगा, कटिहार मेडिकल कॉलेज, कटिहार, लार्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल,सहरसा, मधुबनी मेडिकल कॉलेज,मधुबनी, माता गुजरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, किशनगंज, नारायणा मेडिकल कॉलेज अस्पताल,सासाराम, नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज अस्पताल, बिहटा, राधादेवी जागेश्वरी मेडिकल कॉलेज तुर्की और श्रीनारायण मेडिकल काॅलेज शामिल थे.
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