नोट भी लिखना होगा
पटना : केसों के सुपरवीजन को हल्के में लेने वाले एसपी-एसएसपी की मुश्किल बढ़ने वाली हैं. लंबित केसों का निबटारा करने में पिछड़ने वाले अधिकारी पुलिस मुख्यालय की गुड लिस्ट से बाहर हो जायेंगे. डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने इन अफसरों का टास्क फिक्स कर दिया है. अब जिला पुलिस के मुखिया को कम से कम पांच केसों का सुपरवीजन करना होगा. जिला में दर्ज होने वाले केसों से अधिक केसों का अनुसंधान कराना होगा.
एक अगस्त, 2019 तक लंबित 1.48 लाख केसों के निस्तारण को छह महीने पहले अभियान शुरू हुआ था. 19 महीने में इन केसों का निबटारा कराने के लिए डीजीपी ने सभी रेंज आइजी- डीआइजी तक की जिम्मेदारी तय कर दी थी. टास्क के अनुसार राज्य में हर माह कम से कम 8000 पुराने मामलों का निबटारा करना था. डीजीपी को रिपोर्ट मिली है कि कई जिलों के एसपी- एसएसपी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं. इस लापरवाही से नाराज डीजीपी ने वीडियो कान्फ्रेंस कर सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों की क्लास ली.
मुख्यालय स्तर पर की जा रही है निगरानी
अनुसंधान के लिए लंबित केसों का डिस्पोजल बढ़ाने के लिये सभी एसपी- एसएसपी को सेंपल केस के रूप में पांच बड़े केसों के अनुसंधान का सुपरवीजन का टॉस्क दिया गया है. मुख्यालय स्तर पर इसकी निगरानी की जा रही है.
जितेंद्र कुमार, एडीजी मुख्यालय
