सीएम मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी ने राजद सुप्रीमो पर साधा निशाना
पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि महागठबंधन की सरकार में उपमुख्यमंत्री पद पर रहते हुए तेजस्वी प्रसाद यादव के खिलाफ जब करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति रखने के मामले में आरोपपत्र दाखिल हुआ था, तब मुख्यमंत्री ने उनसे आरोपों का बिंदुवार जवाब मांगा था.
वह जवाब तो आज तक नहीं मिला, लेकिन सत्ता जाने के बाद लालू प्रसाद ने द्वेषपूर्वक नीतीश कुमार पर हत्या के जो आरोप लगाये थे, वे फिर गलत साबित हुए. 1991 में उस मामले में मुख्यमंत्री को क्लीनचिट देने के हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल रखा है. क्या लालू प्रसाद को संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाने के कारण जनता से माफी नहीं मांगनी चाहिए.
जेएनयू में तोड़फोड़ व हिंसा की घटना निंदनीय : डिप्टी सीएम ने एक अन्य ट्वीट में कहा है कि जेएनयू जैसे शीर्षस्थ विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा और तोड़फोड़ की घटना सर्वथा निंदनीय है. यूपीए सरकार ने अपने दस वर्षों के शासन में देश के कुछ परिसरों में जिस तरह से बंदूक की गोली से सत्ता बदलने के सिद्धांत में भरोसा रखने वाले शहरी नक्सलियों को बढ़ावा दिया, उसी का परिणाम है कि ये परिसर हिंसा, संस्कृति विरोध और देशद्रोही गतिविधियां चलाने के अड्डे बनते चले गये.
उन्होंने कहा कि जेएनयू की घटना हिंसा की राजनीति करने वाले छात्र संगठनों की आपसी गुटबाजी का नतीजा है, जिसमें विद्यार्थी परिषद के 25 से ज्यादा छात्रों को निशाना बनाया गया. गृहमंत्री अमित शाह ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिये हैं, जिससे हमलावर जल्द ही बेनकाब होंगे.
तेजस्वी के ज्ञान चक्षु खुल गये होंगे : नीरज कुमार
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ दायर अपील याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सूचना एवं जनसपंर्क मंत्री नीरज कुमार ने राजद नेता तेजस्वी यादव पर हमला बोला है. उन्होेंने ट्वीट कर कहा कि यूं तो चरवाहा विद्यालय के शब्दकोश ने आपकी भाषायी उदंडता जाहिर कर दी है. उम्मीद है ज्ञान चक्षु खुल गये होंगे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जिसमें पटना हाइकोर्ट के दोषमुक्ति का आदेश कायम रखा गया है, शर्म न लगे, तो लगे हाथ पिताश्री के संबोधन में सजायाफ्ता शब्द का भी समावेश कर ही लें.
फैसले का अध्ययन नहीं किया है : राजद
पटना. राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि अभी संबंधित मामले में कोर्ट का फैसला आया है. फैसले का अध्ययन नहीं किया है. हम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं.
