पटना : बिहार में कहने के लिए भले ही पानी भरपूर है. पर, पनबिजली से दो साल पहले तक बनने वाली 35 मेगावाट बिजली का मात्रा 20 से अधिक नहीं बढ़ पायी है.
जनवरी महीने में करीब 34 मेगावाट और बढ़ने के बाद प्रदेश में पनबिजली से बिजली का उत्पादन नये साल में 54 मेगावाट हो जायेगा. करीब दो साल पहले तक राज्य में पनबिजली से करीब 35 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था. इसे बढ़ाकर फिलहाल 54 मेगावाट करने के लिए 13 परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है. सूत्र बताते हैं, नहरों में जनवरी महीने से पानी आने के बाद ही 54 मेगावाट तक बिजली बन सकेगी. वहीं, अतिरिक्त नौ मेगावाट का उत्पादन करने की योजनाओं पर काम चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि राज्य में 13 परियोजनाओं से 54 मेगावाट पनबिजली बनाने की क्षमता विकसित की जा चुकी है. इस समय आठ परियोजनाओं से 20 मेगावाट पनबिजली का उत्पादन हो रहा है.
सभी 13 परियोजनाओं से जनवरी से उत्पादन शुरू हो जायेगा. इसमें डेहरी ऑन सोन में 6.6 मेगावाट, ढेलाबाग-एक मेगावाट, नासरीगंज-एक मेगावाट, सेवारी-एक मेगावाट, जयनगरा- एक मेगावाट, सिरखिंडा-0.7 मेगावाट, वाल्मीकि नगर-15 मेगावाट, त्रिवेणी-तीन मेगावाट, कटैया-19.2 मेगावाट, बेलसार-एक मेगावाट, अरवल-0.5 मेगावाट, बारुण-3.3 मेगावाट और अगनूर में एक मेगावाट पनबिजली उत्पादन की क्षमता शामिल है.
10 परियोजनाओं पर हो रहा है काम
सूत्रों का कहना है कि राज्य में पनबिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए 10 परियोजनाओं पर काम हो रहा है. इनसे करीब नौ मेगावाट पनबिजली का उत्पादन हो सकेगा. इसमें डेहरा में एक मेगावाट, सिपहा-एक मेगावाट, तेजपुरा 1.5 मेगावाट, वलिदाद-0.7 मेगावाट, पहरमा-एक मेगावाट, अमेठी-0.5 मेगावाट, रामपुर-0.250 मेगावाट, नटवार-0.250 मेगावाट, मथौल-0.8 मेगावाट और बरबल में 1.6 मेगावाट की उत्पादन क्षमता शामिल है.
