Bihar Politics: बिहार में नई सरकार के गठन से पहले सियासी बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है. जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने दो बड़ी भविष्यवाणियां कर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. उनके बयान सत्ता परिवर्तन से पहले बड़े राजनीतिक संकेत दे रहे हैं.
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री भले ही कोई भी बने, लेकिन सरकार का असली कंट्रोल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हाथ में रहेगा. उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता बिहार का विकास नहीं बल्कि गुजरात की फैक्ट्रियों के लिए मजदूर उपलब्ध कराना होगा.
उनके मुताबिक, बिहार से बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं को कम वेतन पर गुजरात भेजा जाएगा, जिससे वहां के उद्योगों को फायदा होगा.
‘बिहार से नहीं खत्म होंगी समस्याएं’
अपनी दूसरी भविष्यवाणी में प्रशांत किशोर ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद भी बिहार की मूल समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी. उन्होंने बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को लेकर कहा कि इन मुद्दों पर कोई ठोस सुधार नहीं होगा.
उनका तर्क है कि जनता ने विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि लालच में वोट दिया है, इसलिए बेहतर शासन की उम्मीद करना मुश्किल है.
‘मैन्यूफैक्चर्ड मैंडेट’ पर उठाए सवाल
पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह जनसमर्थन नहीं बल्कि ‘मैन्यूफैक्चर्ड मैंडेट’ है, जो पैसे के प्रभाव से हासिल किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से अब सत्ता परिवर्तन की नौबत आई है और मुख्यमंत्री पद पर वही बैठेगा, जिसे शीर्ष नेतृत्व चाहेगा.
14 अप्रैल को इस्तीफा, नई सरकार का रास्ता साफ
बताया जा रहा है कि 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. बीजेपी विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन होगा और उसी के आधार पर मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी.
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