पटना : 31 दिसंबर तक सुधारें जीएसटी की भूल

पटना : वर्ष 2017-18 के वार्षिक रिटर्न की अंतिम तारीख भी कई बार बढ़ायी गयी है. अब इसे बढ़ा कर 31 दिसंबर निर्धारित किया गया है. साथ ही इसमें बड़े स्तर पर सरलीकरण करते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किये हैं. दरअसल जीएसटी को लागू हुए दो वर्ष से भी अधिक का समय हो गया, […]

पटना : वर्ष 2017-18 के वार्षिक रिटर्न की अंतिम तारीख भी कई बार बढ़ायी गयी है. अब इसे बढ़ा कर 31 दिसंबर निर्धारित किया गया है. साथ ही इसमें बड़े स्तर पर सरलीकरण करते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किये हैं. दरअसल जीएसटी को लागू हुए दो वर्ष से भी अधिक का समय हो गया, लेकिन अभी तक लोग सहजता से रिटर्न नहीं भर पा रहे हैं. इस संबंध में जीएसटी काउंसिल ने समय-समय पर सरलीकरण का प्रयास जारी रखा है.
कौंसिल ने व्यवसायियों से आग्रह किया है कि अंतिम तारीख का इंतजार किये बगैर ही अपनी वार्षिक विवरणी दाखिल कर दें, अन्यथा 200 रुपये प्रतिदिन के विलंब के 25000 रुपये अतिरिक्त जुर्माना भरना पड़ सकता है. इस संबंध में वरीय चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश खेतान ने बताया कि सरकार ने कई सहूलियत वार्षिक रिटर्न भरने में दी है. वैसे व्यवसायी जिनका सालाना कारोबार दो करोड़ रुपये से ज्यादा है, उनके लिए वार्षिक रिटर्न के नियम अलग हैं. उन्हें वार्षिक रिटर्न जीएसटीआर 9 में भरने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट से जीएसटी ऑडिट अलग से करवाना है. इसके लिए अंकेक्षक द्वारा जीएसटीआर- 9C को डिजिटली साइन करके दिया जायेगा.
जीएसटीआर -9 कर सकते हैं दाखिल : जहां तक दो करोड़ से कम टर्नओवर वाले व्यापारियों की बात है, तो उन्हें वार्षिक विवरणी जीएसटीआर-9 भरने की बाध्यता नहीं है.
अगर उन्हें लगता है कि उनसे मासिक या त्रैमासिक विवरणी भरते समय कुछ गलती रह गयी है, जिससे उनकी कुछ करदेयता बनती है, तो उन्हें जीएसटीआर -9 जरूर दाखिल करना चाहिए, जिससे वे पेनाल्टी से बच सकें. अगर वे वार्षिक विवरणी नहीं भी दाखिल करते हैं, तो यह माना जायेगा कि वार्षिक विवरणी दाखिल कर दी गयी है. इसके लिए उनके मासिक या त्रैमासिक विवरणी को आधार बनाया जायेगा. वित्तीय वर्ष 2017-18 की किसी भी गलती को सुधार करने का अंतिम मौका 31 दिसंबर ही होगा. स्पष्ट कर दें कि वार्षिक विवरणी द्वारा कोई भी नया इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं किया जा सकता है.
किये गये हैं बदलाव
दो करोड़ से अधिक टर्न ओवर वाले व्यापारी को वार्षिक विवरणी और ऑडिट रिपोर्ट दोनों ही 31 दिसंबर तक ही जमा करनी होगी. अब सप्लाइ का ब्योरा क्रेडिट नोट और डेबिट नोट का एडजस्टमेंट क्रेडिट की एक ही जगह दिया जा सकता है. साथ ही नील रेटेड, एक्जेंपटेड और नॉन जीएसटी सप्लाइ को भी अलग-अलग दिखाने की बाध्यता नहीं है. टेबल 6 में दिये जाने वाले इनपुट टैक्स को भी अलग-अलग दिखाने की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है. टेबल 17 और 18 में दिये जाने वाले एचएसएन कोड का ब्योरा देने की भी बाध्यता हो भी समाप्त कर दिया गया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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