पटना : प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर की रिक्तियों पर नहीं हो रही नियुक्ति

30 प्रतिशत सीटें पूरे राज्य में रिजर्व पटना : पटना विश्वविद्यालय समेत तमाम विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर व रीडर (वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर) के 30 प्रतिशत पद तीन दशक से खाली हैं, लेकिन उन्हें भरने को लेकर कवायद नहीं हो रही है. सरकार द्वारा सिर्फ लेक्चरर (एसिस्टेंट प्रोफेसर) के पदों पर रिक्तियां मांगी जाती हैं और […]

30 प्रतिशत सीटें पूरे राज्य में रिजर्व
पटना : पटना विश्वविद्यालय समेत तमाम विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर व रीडर (वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर) के 30 प्रतिशत पद तीन दशक से खाली हैं, लेकिन उन्हें भरने को लेकर कवायद नहीं हो रही है. सरकार द्वारा सिर्फ लेक्चरर (एसिस्टेंट प्रोफेसर) के पदों पर रिक्तियां मांगी जाती हैं और उसी पर बहाली होती है. जबकि एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर की उससे अधिक सीटें खाली हैं, लेकिन उस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है.
अगर इन रिक्तियों पर ध्यान दिया जाये तो बहुत हद तक शिक्षकों की कमी को राज्य में दूर किया जा सकता है. पटना विश्वविद्यालय में करीब 250 सीटें प्रोफेसर व रीडर के खाली हैं. सिर्फ लेक्चर की रिक्तियों पर बहाली हो रही है. वह भी अधूरी ही है.
सिर्फ प्रोमोशन से ही बन रहे प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर : राज्य के विभिन्न विवि में जितने भी प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर हैं, सभी प्रोमोशन से बने हैं. वे जब रिटायर भी होते हैं तो सीट लेक्चरर की ही खाली होती है. फिर उन्हीं सीटों पर बहाली होती है. लेकिन पहले ऐसा नहीं था. पहले प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर के लिए वैकेंसी निकलती थी.
लेक्चरर एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) के लिए आवेदन कर सकते थे और एसोसिएट प्रोफेसर प्रोफेसर के लिए आवेदन करते थे. देश भर से लेक्चरर व एसोसिएट प्रोफेसर उन सीटों पर आवेदन करते थे और उस आधार पर साक्षात्कार के बाद चयन होता था. इस प्रकार शिक्षकों के सभी पदों पर बहाली होती थी और कॉलेज व विवि में शिक्षकों की कमी नहीं रहती थी. लेकिन वर्तमान में सिर्फ दाे तिहाई से थोड़े अधिक लेक्चरर के पदों पर ही बहाली हो रही है. बाकी एक तिहाई एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पद खाली ही रह रहे हैं. ऐसा कई दशकों से चल रहा है और सरकार का ध्यान भी इस ओर नहीं है. यह इसलिए भी था कि लेक्चरर के ही पदों पर बहाली एक लंबे अंतराल पर बड़ी मुश्किल से हो रहा था तो इन पदों की कौन सुध ले.
कई बार हो चुकी है मांग
तीस प्रतिशत सीटें रीडर (एसोसिएट प्रोफेसर) व प्रोफेसर की हैं, जिनपर सीधे बहाली होती है, उन पर बहाली नहीं हो रही है. ये रिजर्व सीटेें हैं. इन पर नियुक्ति की जाये या फिर इन्हें डीरिजर्व कर दिया जाना चाहिए. इस संबंध में पूटा कई बार शिक्षा मंत्री से मांग कर चुका है. विधानसभा में संशोधन करके इन सीटों को डिरिजर्व किया जाये. दूसरी बात कि जो वर्तमान सीटें हैं वह 40 साल पहले सेंक्शन हुए थे. नये पोस्ट सेंक्शन नहीं हो रहे हैं. 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए.
प्रो रणधीर कुमार सिंह, पूटा अध्यक्ष

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