पटना : पीपीयू में नया पीजी विभाग खुलने पर संशय

पहले के 11 विभागों के लिए ही जगह नहीं पटना : पाटलिपुत्र विवि अस्तित्व में तो आ गया. लेकिन, पीजी विभागों के संचालन में विवि को काफी परेशानी हो रही है. पहले से 11 विभागों के लिए ही विवि के पास जगह नहीं है जिसके लिए जेडी वीमेंस कॉलेज में सेंटर खोला जाना था. लेकिन, […]

पहले के 11 विभागों के लिए ही जगह नहीं
पटना : पाटलिपुत्र विवि अस्तित्व में तो आ गया. लेकिन, पीजी विभागों के संचालन में विवि को काफी परेशानी हो रही है. पहले से 11 विभागों के लिए ही विवि के पास जगह नहीं है जिसके लिए जेडी वीमेंस कॉलेज में सेंटर खोला जाना था. लेकिन, वहां लड़कियों के विरोध के बाद उन विभागों के संचालन को बेहतर करने के साथ ही नये विभागों के खुलने पर संशय की स्थिति बन गयी है. विवि की ओर से छह अन्य पीजी विभाग आगे खोलने की योजना थी. लेकिन, अब उनके खुलने के आसार नहीं दिख रहे हैं.
यूजीसी के तहत 84 पीजी कोर्स, पीयू में चलते हैं 42 पीजी कोर्स : यूजीसी के तहत 84 पीजी कोर्स हैं. सिर्फ पटना विवि की बात करें, तो यहां सामान्य पीजी व वोकेशनल पीजी मिलाकर कुल 42 कोर्स चल रहे हैं.
इसमें कुल 32 विभाग भी स्थापित है. बाकी वोकेशनल कोर्स हैं जिनका विभाग स्थापित किया जाना है. पीपीयू में पीजी के 11 कोर्स चल रहे हैं. इसमें कॉलेज ऑफ कॉमर्स में अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, अर्थशास्त्र, एएन कॉलेज में भौतिकी, रसायन शास्त्र, गणित और मनोविज्ञान, टीपीएस कॉलेज में जन्तु विज्ञान व वनस्पति विज्ञान तथा बीडी कॉलेज में वाणिज्य कोर्स की पढ़ाई चल रही है.
पीजी विभाग स्थापित करना बड़ी चुनौती : पीपीयू की जो स्थिति है वह काफी दयनीय है और सभी पीजी विभागों को स्थापित करना किसी चुनौती से कम नहीं है. पीपीयू का अपना भवन भी काफी संकुचित है.
कॉलेजों में जगह की काफी कमी है. वहीं जहां जमीन मिली है वहां वर्तमान में बस स्टैंड स्थापित है. जब वह यहां से बैरिया स्थापित होगी, तब मीठापुर में पीपीयू को अपनी जमीन मिल पायेगी. उसके बाद ही भवन की योजना बनायी जा सकती है. तब तक पीजी के कोर्स कहां चलेंगे, इस विषय में कोई विचार पहले नहीं किया गया. जबकि, पीजी विभागों का सीधा संचालन विवि की ओर से किया जाता है. पीजी विभागों का विवि के अंतर्गत विभाग होना आवश्यक है. तभी रिसर्च (पीएचडी) के लिए आगे विवि को दिक्कतें नहीं होंगी. अन्यथा काफी परेशानी हो सकती है.
निकाला जा रहा है निदान
पीजी विभागों को एक जगह करना जरूरी है. ऐसे में सही तरीके से पीजी कोर्स का संचालन संभव नहीं है. रिसर्च वर्क शुरू करना मुश्किल होगा. हमें जमीन एलॉट की गयी है. लेकिन, वर्तमान में वहां बस स्टैंड है. वहीं न मुख्यालय में जगह है और न ही कॉलेजों में. हम कोई तात्कालिक निदान निकालने में लगे हैं.
गिरीश कुमार चौधरी, प्रतिकुलपति, पीपीयू

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