पटना : बिजली के केंद्रीय कोटे में बिहार की हिस्सेदारी बढ़ेगी. अगले साल तक एक हजार मेगावाट तक बिजली की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे बाजार पर राज्य की निर्भरता कम होगी. प्रदेश में इस समय औसतन 5000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होती है. इसमें 3500 से 4000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति एनटीपीसी और एनएचपीसी के माध्यम से होती है. शेष करीब एक हजार मेगावाट बिजली बिहार को बाजार से खरीदनी पड़ती है.
केंद्रीय सेक्टर से बिजली का कोटा बढ़ने के बाद बिहार को बाजार से कम बिजली लेनी होगी. बिजली कंपनी के सूत्रों का कहना है कि बिहार ने पिछले दिनों बेहतर प्रबंधन और सस्ती बिजली के लिए अपने तीन बिजलीघरों को एनटीपीसी को सौंप दिया. इनमें कांटी, बरौनी और नवीनगर शामिल हैं. बिजलीघरों के एनटीपीसी के पास जाने के बाद इनमें बिहार की हिस्सेदारी भी बढ़ी है.
