विजय सिंह
अंचल कार्यालयों में तेजी से पहुंच रहा
दाखिल-खारिज और जमाबंदी का आवेदन
पटना : जमाबंदी की अनिवार्यता से अब फर्जीवाड़ा पर विराम लग जायेगा. ऑनर के द्वारा पॉवर ऑफ अर्टानी अगर किसी को दिया जाता है तो भी बिक्री के लिए ऑनर के नाम से जमाबंदी होनी चाहिए. इस नयी व्यवस्था से अब फर्जीवाड़ा होने की संभावना कम हो गयी है. क्योंकि जमाबंदी के लिए बंटवारा जरूरी है.
अब साझे की पैतृक संपत्ति को बिना बंटवारा किये कोई एक व्यक्ति नहीं बेच सकता है. पहले इस तरह के मामले आते थे कि अगर किसी जमीन में चार हिस्सेदार हैं लेकिन बंटवारा नहीं हुआ है तो एक हिस्सेदार जमीन को बेच देता था. लेकिन अब इस पर रोक लग जायेगा. आने वाले समय में सबकुछ आनलाइन हो जायेगा और लोगों की मुश्किलें आसान हो जायेंगी.
औसतन आधे से भी कम हो रही है रजिस्ट्री : रजिस्ट्री कराने आ रहे लोगों के पेपर को बारीकी से खंगाला जा रहा है. होल्डिंग नंबर और जमाबंदी विक्रेता के नाम पर नहीं होने की स्थिति में निबंधन कार्यालय द्वारा निबंधन नहीं कराया जा रहा है. शुक्रवार को कई लोगों की रजिस्ट्री नहीं हो सकी.
ऐसे कई लोग रजिस्ट्री के लिए आये जिनके पेपर पर जमाबंदी उनके नाम पर नहीं थी. रजिस्टार सत्यनारायण चौधरी ने रजिस्ट्री कराने से मना कर दिया और जमाबंदी कराकर आने के लिए कहा. हालत यह है कि रोज होने वाले औसत रजिस्ट्री में भी कमी आ गयी है. प्रतिदिन 40 से 50 रजिस्ट्री हो रही थी, लेकिन जब से विक्रेता के जमाबंदी को अनिवार्य किया गया है तब से रजिस्ट्री 12 से लेकर 15 तक ही हो पा रही है. सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद दोनों दिन बहुत कम रजिस्ट्री हुई.
दाखिल-खारिज और जमाबंदी के पहुंच रहे आवेदन
रजिस्ट्री में जमाबंदी की अनिवार्यता से जिन लोगों को रजिस्ट्री कराना है वह रजिस्ट्री कार्यालय से लेकर अनुमंडल कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं. पटना सदर कार्यालय में शुक्रवार को बड़ी भीड़ देखी गयी. हालांकि सीओ सदर प्रवीण कुमार पांडेय ने बताया कि सदर अंचल में कुल 2 लाख 15 हजार जमाबंदी है. पहले बहुत पेंडिंग थी, लेकिन कैंप लगाकर पेंडेंसी को खत्म कर दिया गया है. अब प्रतिदिन 10 से 15 आवेदन आ रहे हैं, जिसे तत्काल निपटा दिया जा रहा है.
