पटना : मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि विभाग ने जलवायु अनुकूल खेती की कार्ययोजना तैयार कर ली है. इसके तहत फसल चक्र में उन अनाजों को लगाने के लिए प्रयास है, उससे किसानों को अधिक वर्षा का इंतजार नहीं करना पड़े.
पायलट प्रोजेक्ट के पहले फेज में मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नवादा, गया व नालंदा समेत कुल आठ जिलों के 40 गांवों को मॉडल कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए चयनित किया गया है. जिसके सफल होने पर अन्य नौ जिलों में अपनाने की योजना है.
कृषि विभाग ने जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया, डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय व भारतीय कृषि अनुसंधान के द्वारा तैयार किये गये नये क्रॉप साइकिल व कृषि तकनीक को विकसित किया है. कृषि विभाग चयनित आठ जिलों के पांच-पांच गांव में किसानों की जमीन पर खेती करेगा. जिसकी देखरेख विभाग व विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक करेंगे. खेती में बीज से लेकर उपज की पूरी प्रक्रिया का खर्च विभाग वहन करेगा.
मंशा है कि सफल होने पर दूसरे किसान भी उसी तरह की खेती करें. इसके लिए विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 तक 60 करोड़ 65 लाख 50 हजार रुपये खर्च होने की कार्ययोजना बनी है. विभाग ने पहले वर्ष के लिए 13 करोड़ 93 लाख 90 हजार रुपये की राशि भी स्वीकृत कर दी है.
छह तरह का होगा फसल चक्र : विभाग की ओर से पूरे वर्ष में लगने वाले छह तरह के फसल चक्र का विकल्प तैयार किया गया है. इसमें खरीफ-रबी-गरमा के लिए धान-गेहूं-मूंग, मक्का-सरसों-मूंग, मक्का-मसूर-मूंग, सोयाबीन-गेहूं-मूंग व सोयाबीन-रबी-मक्का के फसलों का समन्वय है. विभाग का आकलन है कि फसल चक्र के अनुसार खेती की जाये, तो फायदा होगा.
