पटना : राज्य सरकार की ओर से शुरू की गयी मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की रफ्तार धीमी रही है. सरकार ने सेक्स रेशियों के अंतर को कम करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरूआत की थी. इसमें बच्चियों के जन्म से लेकर स्नातक डिग्री पूरा करने तक सरकार ने 54,100 समय-समय पर देने का लक्ष्य रखा, ताकि बिहार में भ्रूण हत्या को कम किया जाये और माता पिता बेटियों को बोझ नहीं समझें. लेकिन राज्य सरकार की पदाधिकारी ही योजना को लक्ष्य तक पहुंचाने में सुस्त चल रहे हैं.
अधिकारियों की सुस्ती से कन्या उत्थान योजना की रफ्तार धीमी
पटना : राज्य सरकार की ओर से शुरू की गयी मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की रफ्तार धीमी रही है. सरकार ने सेक्स रेशियों के अंतर को कम करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरूआत की थी. इसमें बच्चियों के जन्म से लेकर स्नातक डिग्री पूरा करने तक सरकार ने 54,100 समय-समय पर देने का […]

अधिकारियों की सुस्ती से कन्या उत्थान योजना की रफ्तार धीमी
2018-19 में 14 लाख बच्चियों का निबंधन कराने का लक्ष्य था और पदाधिकारियों की सुस्ती से अगस्त, 2019 तक महज एक लाख, 14,023 बच्चियों को ही योजना से जोड़ा जा सका है. राज्य सरकार ने योजना को पूरा करने के लिये समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है. तीनों विभागों की इस योजना को लेकर सुस्ती दिख रही है.
2018-19 में यह था लक्ष्य, इतना हुआ काम
मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत समाज कल्याण विभाग को 2018-19 में 14 लाख निबंधन का लक्ष्य दिया गया, लेकिन दिसंबर 2018 से अप्रैल 2019 तक 88 हजार 603 और अगस्त 2019 तक एक लाख 14 हजार 23 लड़कियों को इससे जोड़ा गया.
योजना में एक साल पूरा होने पर आधार से टैग कराना और एक हजार देना था. इसमें अप्रैल 2019 में 3134 और अगस्त 4491 लड़कियों को जोड़ा गया. साथ ही दो वर्ष की आयु होने पर टीकाकरण के लिये 14 लाख का लक्षय रखा गया, लेकिन अगस्त 2019 में 1,39,812 का टीकाकरण हुआ.
यह है योजना
बच्ची के जन्म पर दो हजार. n एक साल की होने पर एक हजार. n टीकाकरण पर दो हजार n सेनेटरी नैपकिन के लिए 300. n 12 क्लास पास करने पर 10 हजार, अगर उस वक्त लड़की का विवाह नहीं हुआ हो तो. n स्नातक डिग्री लेने पर 25 हजार, लड़की की शादी हुई हो या नहीं हुई हो.
राज्य में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा शुरू
पटना. राज्य में प्राथमिक व माध्यमिक कक्षाओं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा हिंदी व उर्दू भाषा के साथ शनिवार से दो पालियों में शुरू हो गयी. पहली पाली दस से बारह बजे व दूसरी एक से तीन बजे तक है.
इसके तहत 71 हजार स्कूलों में करीब दो करोड़ से अधिक बच्चों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है. इसमें से पहली कक्षा के छात्रों की केवल मौखिक परीक्षा होगी. 10 से 20 अक्तूबर तक उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया जायेगा. साथ ही 21 अक्तूबर को छात्र-छात्राओं का रिजल्ट बताया जायेगा.