पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों को जिले की खासियत और बारिश के अनुरूप खेती करने की सलाह दी है. उन्होंने गुरुवार को कृषि विभाग की ओर से दिये गये प्रेजेंटेशन देखने के बाद जिलों के जलवायु के अनुसार फसल चक्र अपनाने की बात कही. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों की बहुत कुछ स्थिति फसलों के बेहतर उत्पादन पर निर्भर है.
पिछले कुछ वर्षों से राज्य में बारिश कम हो रही है, जिसका असर कृषि पर पड़ रहा है. इसलिए लोगों को बारिश की मात्रा के अनुरूप फसल चक्र अपनाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल चक्र कार्यक्रम के तहत होने वाले डिमोंस्ट्रेशन के लिए जिन जिलों का चयन किया जा रहा है, उस क्षेत्र की खासियत के अनुसार वहां उचित प्रयोग किया जाये.
साथ ही स्थानीय जरूरतों के अनुरूप फसलों की विविधता को प्राथमिकता में रखते हुए रिसर्च करना होगा. उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति और दक्षिण बिहार में सुखाड़ की स्थिति में फसलों के चयन पर विशेष तौर पर ध्यान रखना होगा. सीएम ने निर्देश दिया कि जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में फसल चक्र का प्रदर्शन किया जाये, ताकि किसान वहां आकर आसानी से समझ सकें और प्रेरित होकर आगे उसी तरह के फसल चक्र को अपना सकें. इसके अलावा सब्जी की खेती विशेषकर आलू को भी शामिल किया जाये. जैविक खेती में भी क्राॅप्स साइकिल पर रिसर्च किया जाये. उन्होंने बताया कि राज्य में पहले से ही गंगा किनारे के चार जिलों में सब्जी की जैविक खेती पर काम किया जा रहा है.
अब पुरानी परंपरागत फसलों पर भी रिसर्च करने की जरूरत है. प्रेजेंटेशन कृषि विभाग के सचिव एन श्रवण ने दिया. साथ की बताया गया कि जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत चार संस्थान बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथएशिया, इंटरनेशनल मेज एंड व्हीट इंप्रुवमेंट सेंटर, आइसीएआर, बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और राजेंद्र नगर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी काम करेगी. बैठक में मुख्य सचिव दीपक कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.
