एक भी थाना कंप्यूटराइज्ड नहीं

पटना : पटना जिला के एक भी थाने कंप्यूटराइज्ड नहीं हुए हैं. 15 अगस्त तक पटना व नालंदा जिले के 61 थानों को कंप्यूटराइज्ड कर लिया जाना था. कंप्यूटराइज्ड व्यवस्था करने की जिम्मेदारी टीसीएस को दी गयी है और कुछ तकनीकी कारणों से कंपनी द्वारा अक्टूबर तक का समय मांगा गया है. फिलहाल इन सभी […]

पटना : पटना जिला के एक भी थाने कंप्यूटराइज्ड नहीं हुए हैं. 15 अगस्त तक पटना व नालंदा जिले के 61 थानों को कंप्यूटराइज्ड कर लिया जाना था. कंप्यूटराइज्ड व्यवस्था करने की जिम्मेदारी टीसीएस को दी गयी है और कुछ तकनीकी कारणों से कंपनी द्वारा अक्टूबर तक का समय मांगा गया है. फिलहाल इन सभी थानों में मात्र एक ही कंप्यूटर हैं. जिसका उपयोग किसी प्रकार का पत्र निकालने, डाटा निकालने आदि के काम में किया जाता है.

इसमें आम लोगों से जुड़ा कोई काम नहीं होता है. थानों में डाटा इंट्री ऑपरेटर भी नहीं है. जिसके कारण कंप्यूटर के जानकार कांस्टेबल से काम कराया जाता है. पटना जिला में सीसीटीएनएस प्रोजक्ट के तहत हो रहे काम की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी डीएसपी मुख्यालय आलोक कुमार सिंह को दी गयी है.
आलोक कुमार सिंह ने बताया कि जिस टीसीएस कंपनी को इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गयी है, उसने अक्टूबर तक का समय मांगा है. इसके साथ ही करीब 250 थानों को कंप्यूटराइज्ड करने की जानकारी दी है. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) प्रोजेक्ट के तहत पूरे बिहार के 894 थानों की व्यवस्था कंप्यूटराइज्ड करनी थी. लेकिन अब यह व्यवस्था अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना जतायी जा रही है.
पुलिस व आमलोगों को होगा फायदा
सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत अगर थानों को कंप्यूटराइज्ड करने का काम पूरा हो गया तो इससे आम लोगों के साथ ही पुलिस को भी फायदा होगा. आम लोग थानों में दर्ज एफआइआर, डायरी, चार्जशीट को ऑनलाइन देख सकेंगे. इसके साथ ही ऑनलाइन एफआइआर भी कर सकते हैं. जबकि पुलिस के लिए भी काम आसान हो जायेगा. क्योंकि अपराधियों की फिंगर प्रिंट डाटाबेस, गुंडा रजिस्टर, गिरोह की जानकारी आदि ऑनलाइन देख सकेंगे.
मसलन राजस्थान के किसी अपराधी का हुलिया व अन्य जानकारी को बैठे-बैठे पटना जिला की थाना पुलिस देख सकेगी. इससे अनुसंधान करने में आसानी होगी और अपराधियों की पहचान तुरंत कर ली जायेगी. इसके लिए पत्राचार आदि करने की आवश्यकता खत्म हो जायेगी.
प्रोजेक्ट के तहत क्या-क्या किया जाना है
-कंप्यूटर में एक विशेष सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया जायेगा. जिसमें थानों में होने वाली एफआइआर, सुपरविजन रिपोर्ट, चार्जशीट, अपराधियों का डाटाबेस डाला जायेगा.
-काम पूरा होने के बाद हर थानों को एनसीआरबी, एससीआरबी, पुलिस मुख्यालय व अन्य राज्यों के थानों से जोड़ दिया जायेगा.
-हर थाने में कम से कम तीन कंप्यूटर की व्यवस्था की जायेगी.
-इंटरनेट कनेक्शन की व्यवस्था होगी.
-तीन डाटा इंट्री ऑपरेटर की व्यवस्था की जायेगी, जो एफआइआर, सुपरविजन रिपोर्ट, चार्जशीट आदि की इंट्री करेंगे. ताकि उसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा.
अपनी टीम कर रही तैयार
पटना पुलिस भी अपने कंप्यूटर प्रोफेशनल को तैयार कर रही है. इसके लिए सब इंस्पेक्टर, एएसआइ, कांस्टेबल आदि को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. ताकि वे खुद भी प्रोजेक्ट के बनाये गये सॉफ्टवेयर में अपने-अपने केस से संबंधित जानकारी को अंकित कर सकेंगे और ऑनलाइन जानकारी ले सकते हैं. इसके लिए एसएसपी कार्यालय में बने एक हॉल में प्रतिदिन प्रशिक्षण दिया जाता है.
कोतवाली में भी एक कंप्यूटर
कोतवाली थाना में भी मात्र एक कंप्यूटर है. लेकिन डाटा इंट्री ऑपरेटर नहीं है. कोतवाली थाना के एक कंप्यूटर के जानकार कांस्टेबल कंप्यूटर को ऑपरेट करते हैं. थानों से एसएसपी ऑफिस को दिया जाने वाला पत्र, आंकड़ा आदि निकाला जाता है. यह कंप्यूटर भी केवल ऑफिस कार्य के लिए है. यहां भी एफआइआर या अन्य दस्तावेज की व्यवस्था ऑनलाइन नहीं है.

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