कैमूर वन क्षेत्र भी बनेगा टाइगर रिजर्व

पटना : राज्य के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के तर्ज पर कैमूर वन क्षेत्र को भी टाइगर रिजर्व घोषित किया जा सकता है. इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इसके तहत पहले स्टेज में उस वन क्षेत्र में बाघों के पदचिह्नों की गिनती की जा रही है. साथ ही वहां मौजूद अन्य जानवरों […]

पटना : राज्य के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के तर्ज पर कैमूर वन क्षेत्र को भी टाइगर रिजर्व घोषित किया जा सकता है. इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इसके तहत पहले स्टेज में उस वन क्षेत्र में बाघों के पदचिह्नों की गिनती की जा रही है.
साथ ही वहां मौजूद अन्य जानवरों की संख्या की जानकारी सहित अन्य आंकड़े जुटाये जा रहे हैं. ये आंकड़े राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनसीटीए) को भेजे जायेंगे. सभी तथ्यों को अनुकूल पाये जाने और उस पर केंद्र सरकार की सहमति के बाद इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया जायेगा. ऐसा होने पर यह क्षेत्र भी इको टूरिज्म के तौर पर विकसित हो सकेगा.
सूत्रों का कहना है कि कैमूर वन क्षेत्र का इलाका करीब 1800 वर्ग किमी में फैला है. यहां तेंदुआसहित अन्य जानवर पाये गये हैं. इस वन क्षेत्र की पहुंच छोटानागपुर की पहाड़ी और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाके तक है. इस कारण यह वन्य प्राणियों के लिए बहुत बड़ा इलाका है.
वहीं, वीटीआर का इलाका करीब 900 वर्ग किमी में फैला है. यहां भी जहां बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, लोमड़ी, गीदड़, जंगली कुत्ते समेत अन्य शाकाहारी और मांसाहारी वन्य जीव पाये जाते हैं. ऐसे में कैमूर का वन क्षेत्र वीटीआर से करीब दोगुना होने की वजह से वन्य जीवों के लिए बेहतर हो सकता है.

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