राजदेव पांडेय
राज्य निवेश प्रोत्साहन योजना के मिड टर्म रिव्यू के लिए कमेटी गठित, हेल्थ केयर यूनिट में उत्साहजनक िस्थति
पटना : राज्य निवेश प्रोत्साहन अधिनियम लागू होने के बाद से अब तक तीन सालों में राज्य में करीब 1488 करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरा है. इतने निवेश में लगी 175 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों में 4615 लोगों को रोजगार मिला है.
हालांकि, इस अवधि के दौरान निवेश के लिए 16144 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आये थे. इनमें से अधिकतर निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं. सबसे अधिक 1295 करोड़ रुपये का निवेश निर्माण एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में धरातल पर उतरे हैं. उत्साहजनक स्थिति हेल्थ केयर यूनिट में देखी गयी है. राज्य निवेश प्रोत्साहन अधिनियम के जरिये उद्योग का दर्जा पाये सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भी 71 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है.
इनमें पटना में मेडी पार्क, गया में कुमार मल्टी स्पेशियलिटी, जीएचपीसीएल और मुजफ्फरपुर,भागलपुर और बेगूसराय में स्पेशियलिटी अस्पताल खोले गये हैं. हालांकि, सबसे ज्यादा निराशाजनक स्थिति तकनीकी संस्थानों, प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क, सीमेंट, चीनी मिल सेक्टर में निवेश प्रस्तावों को लेकर है. इस क्षेत्र में एक भी रुपये का निवेश नहीं हो सका है.
रिव्यू शुरू
राज्य सरकार ने निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत मिड टर्म रिव्यू शुरू कर दिया है. इसके लिए उद्योग विभाग ने एक कमेटी भी गठित की है. यह कमेटी इस योजना की कमियां और उपलब्धियों का ब्योरा जुटायेगी. यह कमेटी औद्योगिक संगठनों से फीडबैक हासिल कर रही है. जल्दी ही यह विशेषज्ञ कमेटी सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी.
फैक्ट फाइल
-राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद से अनुमोदन के लिए ऑनलाइन
आवेदनों की संख्या – 1281
-पर्षद से स्टेज
वन क्लियरेंस सहमति प्राप्त प्रस्तावों की
संख्या – 1134
-प्रस्तावित
पूंजी निवेश – 16144 करोड़
-वित्तीय प्रोत्साहन क्लियरेंस के लिए प्राप्त प्रस्तावों की संख्या – 374
-स्वीकृत प्रस्तावों की
संख्या – 275
-क्लीयरेंस प्राप्त इकाइयों में पूंजी निवेश – 2177 करोड़
-कार्यरत इकाइयों की संख्या – 175
इकाइयों की स्थिति
सेक्टर इकाइयों निवेश
की संख्या (करोड़ में)
खाद्य प्रसंस्करण 83 508
विनिर्माण 46 687 से अधिक
ऊर्जा 2 108 से अधिक
लघु यंत्र 1 2
प्लास्टिक एवं रबड़ 17 50
टेक्सटाइल 1 1 से अधिक
सूचना प्रोद्यौगिकी 9 23
पर्यटन 6 36
हेल्थ केयर 10 71
नोट : सभी आंकड़े उद्योग विभाग के हैं. आंकड़े 22 अगस्त, 2019 तक के हैं.
