अनुपम कुमार, पटना : वर्तमान मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के पहले आठ वर्षों में दो-दो साल पर और उसके बाद हर साल अपना फिटनेस जांच कराना है. पिछले 10 वर्षों में पटना में 1.07 लाख व्यावसायिक वाहनों का पंजीकरण हुआ है.
उसके पहले पंजीकृत वाहनों की संख्या भी लगभग 50 हजार है. इस प्रकार 1.57 लाख व्यावसायिक वाहन हर दिन पटना की सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनमें लगभग एक लाख को हर वर्ष फिटनेस रिन्यूअल की जरूरत पड़ती है. लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए यहां न तो कोई सुविधा संपन्न सेंटर है और न ही जिला परिवहन कार्यालय के पास पर्याप्त संख्या में कर्मी हैं.
महज एक एमवीआइ के जिम्मे सभी व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच है और इसके लिए उनको आधारभूत सुविधाएं भी नहीं दी गयी हैं. उपकरण उपलब्ध नहीं होने से वे पूरी तरह अपने ज्ञानेंद्रियों के सहारे ही वाहनों की फिटनेस जांच के लिए बाध्य हैं जो प्राय: खानापूर्ति बन कर रह जाती है.
खुले क्षेत्र में निरीक्षण
फुलवारी डिपो परिसर के खुले क्षेत्र में होता निरीक्षण
एमवीआइ द्वारा वाहनों की फिटनेस जांच बीएसआरटीसी के फुलवारी डिपो में होती है. लेकिन उन्हें वहां के वर्कशॉप में उपलब्ध रैंप और अन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है. वर्कशॉप के बाहर डिपो परिसर में वाहनों की जांच होती है जो पूरी तरह एमवीआइ के व्यक्तिगत निरीक्षण पर आधारित होती है. धुएं के कालेपन को देखकर वाहनों के प्रदूषण स्तर का अनुमान लगाना पड़ता है और प्रस्तुत प्रदूषण सर्टिफिकेट की वैद्यता तय करनी पड़ती है.
व्हील एलायनमेंट और बैलेंसिंग जैसे उपकरणों के नहीं होने से चक्कों की घिसावट और उनके बीच संतुलन का अंदाज भी वाहनों की चाल देख कर लगाना पड़ता है. ब्रेक की ताकत का अंदाज उसको दबा कर लगाना पड़ता है. दिन के समय बिना उपकरणों के सहारे हेडलाइट एलाइनमेंट चेक करना तो बिल्कुल ही संभव नहीं हो पाता है.
प्राइवेट फिटनेस जांच सेंटर में भी सभी सुविधाएं नहीं
पटना जिले में केवल एक प्राइवेट फिटनेस जांच सेंटर है जो नौबतपुर में है. मुरारी ऑटो नामक इस सेंटर में भी सभी जांच सुविधाएं नहीं हैं. अपने आप ब्रेक की क्षमता चेक करनेवाली ऑटोमेटिक ब्रेक ड्रम मशीन यहां नहीं है और इस काम को मैनुअल मशीन के द्वारा किया जाता है.
हाइड्रोलिक रैंप की जगह फिक्स रैंप है. यहां के द्वारा जारी फिटनेस सर्टिफिकेट को एवीआइ से प्रति हस्ताक्षरित कराना जरूरी होता है, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी होती है.
फिटनेस जांच के लिए जरूरी उपकरण
उपकरण काम
हाइड्रोलिक रैंप वाहनों के निचले हिस्से का निरीक्षण व जांच
फोर गैस एनालाइजर डीजल चालित वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच
स्मोक मीटर पेट्रोल चालित वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच
व्हील एलायनमेंट चक्कों के घिसावट की जांच
व्हील बैलेंसिंग चक्कोंं का संतुलन चेक करना
हेडलाइट एलाइनर हेडलाइट का झुकाव चेक करना
ऑटोमेटिक ब्रेक ड्रम अपने आप ब्रेक की क्षमता चेक करना
2008-09 से 2018-19 के बीच पंजीकृत व्यावसायिक वाहन
वाहन संख्या
तीन पहिया 50350
ट्रक 37367
टैक्सी 15193
बस 4285
कुल 107195
बिहटा में बनेगा पहला सरकारी फिटनेस सेंटर
बिहटा में प्रदेश का पहला सरकारी फिटनेस जांच सेंटर बनेगा. बिहटा के सिकंदरपुर में बियाडा की भूमि पर 14 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सेंटर पूरी तरह स्वचालित होगा.
सेंटरों के लिए जरूरी
लोकसभा से पास नये मोटर वाहन कानून के अनुसार सभी फिटनेस जांच सेंटरों का स्वचालित होना जरूरी होगा. उसे ऐसा सेटअप बनाना होगा कि वर्कशॉप से बाहर निकलने के दौरान इंजन, प्रदूषण स्तर, ब्रेक, चक्का, लाइट समेत सभी हिस्से की अपने आप जांच हो जाये.
फिटनेस जांच में उपकरणों की कमी से होने वाली असुविधा अस्थायी है. बिहटा में हम पूरी तरह स्वचालित फिटनेस सेंटर बना रहे है. उसके कार्यरत होते समस्या खत्म हो जायेगी.
अजय कुमार ठाकुर, डीटीओ, पटना
