दो हजार अस्पताल, पर डाॅक्टर सिर्फ 5200 ही

शशिभूषण कुंवर, पटना : राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भरोसा लौटने के बाद हर महीने एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 11 हजार मरीज इलाज कराने आ रहे हैं. मरीजों की संख्या तो बढ़ी, पर इसकी तुलना में न तो अस्पतालों की संख्या बढ़ी और नहीं डाॅक्टरों की संख्या बढ़ी. इसके अलावा हर […]

शशिभूषण कुंवर, पटना : राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भरोसा लौटने के बाद हर महीने एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 11 हजार मरीज इलाज कराने आ रहे हैं. मरीजों की संख्या तो बढ़ी, पर इसकी तुलना में न तो अस्पतालों की संख्या बढ़ी और नहीं डाॅक्टरों की संख्या बढ़ी. इसके अलावा हर साल इन सरकारी अस्पतालों में करीब 16 लाख से अधिक महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया जाता है.

ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए पूरे राज्य में कुल 2049 अस्पतालों की संरचना खड़ी की गयी है. राज्य की ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए मात्र 5200 डाॅक्टर तैनात हैं. मरीजों की बढ़ी संख्या और अस्पतालों की संरचना के साथ चिकित्सकों की तैनाती के बीच बड़ा गैप बना हुआ है.
सरकारी अस्पतालों में डाॅक्टरों के ऊपर पड़ने वाले दबाव को मरीजों की संख्या से देखा जा सकता है. सरकार द्वारा मरीजों की सेवा के लिए नियमित डाॅक्टरों के कुल 7249 पद स्वीकृत किये गये हैं. इन नियमित पदों में से सिर्फ 4172 पदों पर ही चिकित्सक तैनात हैं. इसी तरह से राज्य में संविदा वाले डाॅक्टरों के 2314 पद स्वीकृत किये गये हैं.
इन पदों के विरुद्ध मात्र 1033 पद पर संविदा वाले डाॅक्टर कार्यरत हैं. वर्तमान में कुल 5200 तैनात चिकित्सकों में से 200 से अधिक चिकित्सकों को प्रशासनिक कार्यों में लगाया गया है. प्रशासनिक पदों में सिविल सर्जन, एसीएमओ, जिला मलेरिया, फाइलेरिया, टीबी, टीकाकरण जैसे कार्यक्रम पदाधिकारी, क्षेत्रीय उप निदेशक, निदेशक सहित अन्य पद शामिल हैं. परेशानी नहीं हो, इसलिए 700 अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं दी जा रही हैं.
एक नजर में
जिला अस्पताल 36
अनुमंडलीय अस्पताल 55
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 167
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 366
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र1379
कार्यरत डॉक्टरों की संख्या
डाॅक्टरों के स्वीकृत कुल पद 7249
कार्यरत नियमित डॉक्टर4172
कार्यरत संविदा डॉक्टर 1033

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