पटना : पटना जीपीओ में हुए 50 लाख के घोटाले का मुख्य आरोपित डाक सहायक मुन्ना कुमार जिसे शनिवार को निलंबित कर दिया गया, इससे पहले भी लेन देन में गड़बड़ी के मामलों में दो बार दोषी पाया जा चुका है. कुछ माह तक उसके कार्यालय आने पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया था.
लेकिन, अधिकारियों की मिली भगत से फिर काउंटर क्लर्क का प्रभार ले लिया. मिली जानकारी के अनुसार मुन्ना कुमार पिछले चार-पांच साल से काउंटर क्लर्क के रुप में तैनात था. जांच के दौरान मुन्ना कुमार ने लगभग 22 लाख रुपये गबन की बात स्वीकारी. सूत्रों की मानें तो यह खुलासा हिस्सा न मिलने से नाराज कर्मियों के द्वारा डमी उपभोक्ताओं के नाम से पटना के चीफ पोस्ट मास्टर को पत्र लिखने से हुई, जिसमें मामले की जांच करने का अनुरोध किया गया था.
डाक विभाग के वरीय अधिकारियों के अनुसार इस मामले की तह तक जाने में कम से कम पिछले आठ दस सालों का रिकाॅर्ड खंगालना पड़ेगा. जांच प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम 10-15 दिनों का वक्त लगेगा क्योंकि अभी तक जो साक्ष्य मिले हैं वह घोटाला साइलेंट अकाउंट से किया गया है जो पिछले 25 सालों से बंद पड़ा था. मिली जानकारी के अनुसार पटना के चीफ पोस्ट मास्टर राजदेव प्रसाद 2016-17 में आरा में डाक अधीक्षक थे तब उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये के घोटाले को उजागर किया था.
इस बीच केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डाक विभाग के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल सहित अन्य वरीय अधिकारियों से प्रभात खबर में प्रकाशित खबर पटना जीपीओ में 50 लाख से अधिक का घोटाला को गंभीरता से लेते हुए इसके बारे में जानकारी प्राप्त की और जल्द-से-जल्द जांच कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इस संदर्भ में जब चीफ पोस्ट मास्टर एमइ हक से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
