पटना : प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया पत्रकारिता का माध्यम नहीं है. वह सिर्फ विचार रखने का एक मंच है. उसके लिए काम करने वाले व्यक्ति पत्रकार नहीं हैं.
पटना में दो दिनों की बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने मौजूदा पत्रकारिता को लेकर तल्ख टिप्पणी भी की. उन्होंने कहा कि आजकल पत्रकार हाहाकार या जयकार वाली खबर लिखते हैं, लेकिन पत्रकारों को चाहिए कि वह ऐसी खबरें लिखें, जो विश्वसनीयता पर खरी उतरे. जस्टिस कुमार के साथ पीसीआइ के सदस्य वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त और सचिव अनुपमा भटनागर भी प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद थे. जस्टिस कुमार ने कहा कि प्रेस काउंसिल की सुनवाई में 41 मामले आये, जिसमें से 18 मामले बिहार के थे. प्रेस वार्ता के दौरान अखबारों पर कड़ी टिप्पणी की है. सुनवाई में बिहार, बंगाल, उड़िसा सहित अन्य राज्यों के मामले भी आये थे. प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने कहा कि डीपीआरओ अपनी मर्जी से गैर पत्रकारों को प्रेस कार्ड दे देते है.
सुनवाई के दौरान भी खगड़िया का एक मामला आया, जिसमें डीपीआरओ ने ड्राइवर व चपरासी को प्रेस कार्ड दिया था. इस मामले पर कड़ी आपत्ति करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया कि मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाये.
चेयरमैन ने सख्त आपत्ति जतायी : सुनवाई के दौरान अधिकतर मामले पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ बदसलूकी से जुड़े थे, पर सुनवाई के दौरान उपस्थित पुलिस अधिकारियों को पीसीआइ के क्रियाकलापों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इस पर चेयरमैन ने सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि वह डीजीपी को सख्त निर्देश देंगे कि अगली सुनवाई में उन्हें पूरी जानकारी के साथ भेजा जाये.
