पटना : केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री एवं लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान शुक्रवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गये. चार दशक से बिहार की राजनीति की धुरी पासवान दूसरी बार उच्च सदन के सदस्य चुने गये हैं. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के लोकसभा सदस्य चुने जाने से रिक्त हुई राज्यसभा की सीट पर वे एनडीए के उम्मीदवार थे.
पासवान राज्यसभा के लिए निर्वाचित
पटना : केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री एवं लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान शुक्रवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गये. चार दशक से बिहार की राजनीति की धुरी पासवान दूसरी बार उच्च सदन के सदस्य चुने गये हैं. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के लोकसभा सदस्य चुने जाने से रिक्त हुई […]

पार्टी सुप्रीमो को जीत का प्रमाणपत्र मिलते ही राज्यसभा में भी लोजपा का भी खाता खुल गया है. इससे पहले वह 2010 में लालू प्रसाद के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे. लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीटों का जो बंटवारा हुआ था उसमें घटक दल लोजपा के खाते में लोकसभा की छह सीटें मिली थीं.
रामविलास पासवान ने 20 जून को राज्यसभा के लिए नामांकन किया था. शुक्रवार को नाम वापसी की अवधि खत्म होने के बाद विधानसभा सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने उनके विधिवत चुने जाने की घोषणा की और उन्हें निर्वाचित होने का प्रमाणपत्र सौंपा. केंद्रीय मंत्री पत्नी के साथ प्रमाणपत्र लेने पहुंचे थे.
डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, मंत्रीगणों में श्रवण कुमार, डॉ प्रेम कुमार, विनोद सिंह, रामनरायण मंडल व लोजपा विधायक राजू तिवारी, पूर्व विधायक सुनील पांडे, पूर्व पार्षद विनोद सिंह, लोजपा प्रवक्ता अशरफ अंसारी आदि भी साथ थे. प्रमाणपत्र लेने के बाद पासवान ने विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी से मुलाकात की. यहां सभी दलों के नेताओं ने उन्हें बधाई दी.
यहां से वह विधानसभा के सदन में गये और उस सीट को देखकर भावुक हो गये जिस पर 1969 में पहली बार विधायक चुने जाने के बाद बैठा करते थे. रामविलास पासवान ने कहा कि उनकी जीत का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नित्यानंद राय, सीएम नीतीश कुमार को जाता है. एनडीए अटूट है.
जब उनसे यह पूछा गया कि मुजफ्फरपुर में एइएस से पीड़ित बच्चों से मिलने क्यों नहीं गये, तो उनका कहना था कि इसका कारण मीडिया है. श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज एवं अस्पताल मुजफ्फरपुर में अगर कोई जाता है, तो मीडिया उसे ‘नौटंकी’ बताता है. अगर हम नहीं जाते हैं, तो सवाल पूछते हैं कि आप क्यों नहीं गये?