अनुज शर्मा
पटना : अग्निसुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए बिहार फायर सर्विस रूल तैयार कर रहा है. गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएं ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया है. इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही विभाग के अधिकारियों को फायर सेफ्टी के नियमाें का पालन नहीं करने वालों पर सीधी और कठोर कार्रवाई करने की शक्ति मिल जायेगी.
अग्निसुरक्षा के उपकरणों का पालन करना, न करना भवन मालिक पर निर्भर है. इसकी बड़ी वजह राज्य में फायर सेफ्टी के लिए 2014 का जो एक्ट है उसमें अग्निशमन सेवा के अधिकारियों को नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई का अधिकार नहीं है. ऑडिट कर नोटिस जारी करने तक का ही अधिकार है.
नोटिस के बाद भी फायर सेफ्टी की अनदेखी करने वाले भवन स्वामियों पर कार्रवाई कराने के लिए विभागीय अधिकारी एसडीओ पर निर्भर हैं. यही कारण है कि राज्य की राजधानी में ही 300 भवनों की ऑडिट में एक भी इमारत मानक पूरे करने वाली नहीं मिली. दिल्ली और दूसरे राज्यों के पैटर्न पर बिहार फायर सर्विस रूल तैयार किया गया है. इसमें जो प्रस्ताव दिया गया है उसमें फायर ब्रिगेड को आधुनिकीकरण के साथ-साथ फायर आॅफिसरों को भवन सीज करने तक का पावर देने की बात कही गयी है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बिहार फायर सर्विस रूल को गृह विभाग की मंजूरी के बाद कार्मिक विभाग ने भी स्वीकृत कर दिया है. वित्त विभाग इस पर मंथन कर रहा है.
महाराष्ट्र में 50 हजार रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगाने का प्रावधान : महाराष्ट्र में नेशनल सेफ्टी एक्ट 2009 लागू है. इसके तहत फायर सेफ्टी उपकरण का प्रयोग नहीं करने और एनओसी रिन्युअल नहीं कराने पर बिजली और पानी के कनेक्शन काटने सहित 50 हजार रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगाने का प्रावधान है. दिल्ली हरियाणा, गुजरात तक में अपने पूरे फायर सेफ्टी एक्ट लागू हैं. इनका पालन भी सख्ती से कराया जाता है.
