पटना : राज्य में फेरी यातायात व सैरात के कार्यकलापों में पंचायती राज संस्थानों को उनके संवैधानिक अधिकार व शक्ति नहीं दिये जाने के मामले में पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को एक स्पष्ट कानूनी प्रारूप दो सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया है.
मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही, न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह, न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार, न्यायमूर्ति सुधीर सिंह एवं न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की पीठ ने रूपौली यातायात, थाना द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है. कोर्ट के निर्देश पर सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव एवं अन्य विभागों के आला अधिकारी कोर्ट में मौजूद थे.
सूबे में जल परिवहन को नियंत्रित करने वाले बंगाल फेरी कानून व सैरात बंदोबस्ती कानून में पंचायती राज संस्थानों को उनका संविधान प्रदत्त अधिकार मुहैया कराने के िलए हाइकोर्ट ने एक नये कानून की जरूरत पर विचार करने का निर्देश राज्य सरकार
को दिया है.
कोर्ट में मौजूद राज्य के मुख्य सचिव ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि जल्द ही राज्य सरकार इस मामले पर एक स्पष्ट कानून लायेगी, जिसमें पंचायती संस्थानों को उक्त मामलों में उनके संवैधानिक अधिकार निहित होंगे. इस पर कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया कि दो महीने में ऐसे कानून को बनाकर उसका एक प्रारूप कोर्ट में पेश करें. इस मामले पर अगली सुनवाई अब दो सप्ताह के बाद होगी.
