- पटना में 397 एकड़, समस्तीपुर में तीन हजार एकड़ असर्वेक्षित जमीन
पटना : नदियों की धारा बदलने से निकलने वाली जमीन का सर्वे िकया जायेगा. विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाकर पता किया जायेगा निकलने वाली जमीन सरकारी है या रैयती. पटना सहित एक दर्जन जिलों में नदियों की धारा बदलने से निकलने वाली जमीन को लेकर गड़बड़ी की शिकायत मिली है. पटना सहित छपरा, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, खगड़िया, गोपालगंज, बक्सर, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण में ऐसी जमीन के बारे में पता चला है.
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पटना में लगभग 397 एकड़, समस्तीपुर में तीन हजार एकड़ व लखीसराय में दो हजार एकड़ असर्वेक्षित जमीन है. ऐसी जमीनों के बारे में अन्य जिलाें से रिपोर्ट मंगायी जा रही है. राजस्व व भूमि सुधार विभाग नदियों की धारा बदलने से निकलने वाले जमीन का सर्वे करायेगा.
नहीं हुआ था सर्वेक्षण
विभागीय सूत्र ने बताया कि रिविजनल सर्वेक्षण के समय नदी की जमीन का सर्वेक्षण नहीं हो सका था. इस वजह से ऐसी जमीन का खाता, खेसरा, चौहद्दी, जमीन के प्रकार व स्वामित्व के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं होने से परेशानी हो रही है. अब नदी की धारा बदलने से जमीन के निकलने पर यह पता नहीं चल पा रहा है कि यह किस प्रकार की जमीन है.
एक विभागीय अधिकारी ने बताया कि विशेष सर्वेक्षण के तहत ऐसी जमीन का सर्वे करा कर इसकी जानकारी ली जायेगी. इस संबंध में संबंधित जिलों से रिपोर्ट मांगी गयी है. ताकि ऐसे जमीन के बारे में पता लगाया जा सके और आगे कार्रवाई की जा सके.
यह हो रही गड़बड़ी
जानकारों के अनुसार नदियों की धारा बदलने से निकलने वाली जमीन को लेकर गड़बड़ी हो रही है. सरकारी जमीन होने पर भी उसे रैयती बता कर कब्जा करने की कोशिश हो रही है. कहीं-कहीं जमीन की बिक्री भी हो रही है. सारण में लगभग सौ मौजों में इस प्रकार की जमीन चिह्नित हुई है. पटना में भी गंगा की धारा बदलने के बाद निकलने वाली जमीन पर लोगों ने कब्जा किया है.
