पटना : मनरेगा में चालू वित्तीय वर्ष में खासकर सिंचाई के साधनों के साथ-साथ जल संरक्षण वाले कामों पर फोकस िकया जायेगा. ऐसे भी राज्य में मनरेगा का प्राकृतिक संसाधन सेक्टर में खर्च राष्ट्रीय मानक से कम है.
चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में मनरेगा मे इस सेक्टर पर खास फोकस किया गया है. राज्य के मनरेगा आयुक्त सीपी खंडूजा ने सभी उपविकास आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि चालू वित्तीय वर्ष में प्राकृतिक संसाधनों खासकर जल संरक्षण व जल संचयन, लघु सिंचाई, भूमि विकास वाली योजनाओं को प्राथमिकता दें. पुराने जल निकायों जैसे तालाब, बांध, नाला, डांड़ आदि का जीर्णोद्धार करें ताकि जल स्तर भी मेंटेंन रहे व किसानों को पटवन में सुविधा हो.
पत्र में इस काम को 15 जून तक पूरा कर लेेने को कहा गया है. पत्र में कहा गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में 2018-19 में प्राकृतिक संसाधनों पर मात्र 44.93 फीसदी ही खर्च हुआ, जो राष्ट्रीय औसत 62.21 फीसदी से काफी कम है. इसी तरह मनरेगा में कृषि संबधी योजना को प्राथमिकता देने को कहा गया है. पिछले वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता नहीं दी गयी थी. इसको बढ़ाकर 60 फीसदी करना है. पिछले वित्तीय वर्ष में यह 54.21 प्रतिशत रहा. सिर्फ एक मधेपुरा जिले में 65 प्रतिशत रहा.
