पटना : राज्य में मनरेगा का 14 लाख मानव दिवस का कार्य अधूरा है. ग्रामीण विकास विभाग ने 2017-18 और 2018-19 के मनरेगा के बचे काम को 31 जुलाई तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया है. 50 फीसदी अपूर्ण काम को 31 मई तक और शेष बचे 50 फीसदी काम को 31 जुलाई तक पूरा करना है. दोनों वित्तीय वर्ष में मनरेगा के 32 लाख 85 हजार 642 काम में से 14 लाख 31 हजार 533 काम अधूरा है.
राज्य के मनरेगा आयुक्त सीपी खंडूजा की ओर से इस संबंध में सभी जिलाधिकारी और उपविकास आयुक्त को पत्र भेजा गया है. मनरेगा आयुक्त की ओर से सभी जिलाधिकारी व डीडीसी को भेजे गये पत्र के अनुसार 2017-18 और उसके पहले के मनरेगा का 13 लाख 61 हजार 916 काम शुरू हुआ, जिसमें से 9 लाख 8 हजार 310 काम पूरा हुआ.
अब भी 4 लाख 53 हजार 606 काम अधूरा है. इसी प्रकार 2018-19 व उसके पहले का 1912726 काम शुरू हुआ. इस वित्तीय वर्ष में 9 लाख 39 हजार 799 काम पूरा हुआ और 9 लाख 77 हजार 927 काम अधूरा है. पत्र में कहा गया है कि अपूर्ण काम की संख्या में बढ़ोतरी होने का एक बड़ा कारण ठीक तरह से डाॅक्यूमेंटशन नहीं करना भी है. 2018-19 तक शुरू किये गये 6 लाख 64 हजार 484 अपूर्ण काम में से 2 लाख 63 हजार 764 काम साल 2017-18 या उसके पहले का है.
पत्र में कहा गया है कि एक अप्रैल तक जो भी काम अधूरा है उसका 50 फीसदी 31 मई तक और शेष 50 फीसदी काम 31 जुलाई तक पूरा कर लेना है. पत्र में यह भी कहा गया है कि जो भी काम अधूरा है उसका 40 फीसदी 30 अप्रैल तक और 60 फीसदी 30 जून तक हर हाल में शुरू कर देना है.
इन कामों को 31 दिसंबर तक पूरा कर देना है. एक लाख 35 हजार 436 काम ऐसे हैं जिसमें 75 से 100 फीसदी तक खर्च हो गये हैं. ऐसे कामों को हर हाल में 31 मई तक पूरा कर देना है. पत्र के अनुसार दो लाख 91 हजार 914 ऐसे काम हैं जिनमें पिछले तीन साल में कोई खर्च नहीं हुआ है. विभाग ने ऐसे कामों की भी सूची बनाने को कहा गया है, जिसमें अब तक कोई खर्च हुआ है और अब उसकी अगर जरूरत नहीं है.
विभाग इस पर ठोस निर्णय लेगा. मनरेगा से बनने वाले आंगनवाड़ी केंद्र में 488 ऐसे काम हैं, जो अब तक अपूर्ण हैं. इसमें से 267 काम को 31 अगस्त तक और बचे हुए 211 काम को 31 अक्टूबर तक पूरा करना है. ग्रामीण शौचालय, मनरेगा भवन और आंगनवाड़ी केंद्र को बचे हुए काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है.
