पटना : बिहार में समाजवादी पार्टी चुनावी रणक्षेत्र से बाहर हो गयी है. महागठबंधन के साथ कदम से कदम मिलाकर बिहार में काम करने वाली समाजवादी पार्टी को जब लोकसभा चुनाव में दरकिनार कर दिया गया, तो पार्टी कार्यकर्ता यूपी जाकर सपा अध्यक्ष से मिले, कार्यकर्ताओं को आश्वासन िमला. महागठबंधन ने सीटों की घोषणा कर दी और कार्यकर्ताओं को लगने लगा कि पार्टी अब कोई निर्णय बिहार के संदर्भ में नहीं लेगी, तो पार्टी पूरी तरह से टूट गयी. बिहार सपा अध्यक्ष एवं पार्टी के महासचिव ने इस्तीफा दिया और खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया. इसके बाद से बिहार में सपा पूरी तरह से विलुप्त हो गयी है.
जिन लोगों ने पद से इस्तीफा दिया, उस पद पर दोबारा से किसी को बिठाया भी नहीं गया है. ऐसे में सपा कार्यालय कार्यकर्ताओं के बिना सुना हो गया है. बिहार में 2014 लोकसभा चुनाव में भी कार्यकर्ताओं के आहवाहन पर 10 सीटों पर लड़ा था.
उस वक्त भी चुनाव में सपा को टिकट नहीं मिला, तो सपा अध्यक्ष ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था. सपा से टूटकर कार्यकर्ता समाजवादी जनता पार्टी दल डी के बैनर तले एक जुट हुए और 11 जगहों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. फिलहाल सपा के पूर्व बिहार अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद यादव झंझारपुर एवं पूर्व सपा प्रदेश महासचिव श्री भगवान प्रभाकर पाटलीपुत्रा से चुनाव लड़ेंगे.
