पटना : नये वित्तीय वर्ष से पहले निबटा लें ये काम

कई स्कीमों में समय पर रुपये नहीं जमा करने पर लग सकता है फाइन पटना : वित्तीय वर्ष (2018-19) समाप्त होने में केवल चार दिन शेष बचे हैं. एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जायेगा. जहां नये वित्त वर्ष में कई नये निगम लागू होने से लाभ होंगे, तो दूसरी ओर वित्तीय वर्ष […]

कई स्कीमों में समय पर रुपये नहीं जमा करने पर लग सकता है फाइन
पटना : वित्तीय वर्ष (2018-19) समाप्त होने में केवल चार दिन शेष बचे हैं. एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जायेगा. जहां नये वित्त वर्ष में कई नये निगम लागू होने से लाभ होंगे, तो दूसरी ओर वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से पूर्व काम नहीं करने पर फाइन देना पड़ सकता है.
सुकन्या समृद्धि स्कीम, पीपीएफ और एनपीएस के तहत खाता खुलवाया है और अभी तक इस साल में एक बार भी किस्त जमा नहीं की है, तो जल्द किस्त जमा कर दें, नहीं तो फाइन जमा करना होगा और खाता भी बंद हो सकता है.
इसलिए समय रहते किस्त जमा कर दें. बांकीपुर डाकघर के वरीय डाक अधीक्षक हमाद जफर ने बताया कि अगर किसी ने अपनी बेटियों के नाम से सुकन्या खाता खुलवाया है, तो उन्हें साल में कम-से-कम एक हजार रुपये जमा करना है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें 50 रुपये प्रति खाता फाइन देना होगा.
जिन लोगों ने पीपीएफ में निवेश कर रखा है, तो अपनी किस्त 31 मार्च तक जमा कर दें, नहीं तो 50 रुपये का फाइन देना होगा. इस स्कीम में कम-से-कम पीपीएफ खाते में 500 रुपये जमा करना अनिवार्य है. इसी तरह नेशनल पेंशन स्कीम के तहत निवेशकों को साल में कम-से-कम एक हजार रुपये जमा करना अनिवार्य है. अगर 31 मार्च से पहले किस्त जमा नहीं किया, तो 100 रुपये का फाइन देना पड़ेगा.
मिलेंगे कई फायदे भी
वहीं नये वित्त वर्ष 2019-20 में लोगों को कुछ मामलों में फायदा भी मिलेगा. एक अप्रैल से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) का नया प्रावधान लागू हो जायेगा. नये प्रावधान के तहत अब नौकरी बदलने पर कर्मचारी को पीएफ राशि ट्रांसफर करान��� को लेकर इपीएफओ कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा. फिलहाल ट्रांसफर के लिए आवेदन करने का प्रावधान था. लेकिन अब पीएफ अकाउंट खुद-ब-खुद ट्रांसफर हो जायेगा. इस प्रावधान से लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा.
आठ फीसदी के बदले एक फीसदी लगेगा टैक्स : वरीय चार्टर्ड अकाउंटेंट मशींद्र कुमार मशी के अनुसार एक अप्रैल से बिल्डर के लिए एक नये ऑप्शन की शुरुआत होगी. इसके अनुसार बिल्डर के पास जीएसटी पांच फीसदी देने का ऑप्शन है, लेकिन इसके साथ-साथ यह शर्त है कि वह किसी भी तरह का इनपुट क्रेडिट नहीं लेगा. अफोर्डेबल हाउस के लिए जीएसटी रेट इस शर्त के अनुसार आठ फीसदी के बदले एक फीसदी ही लगेगा.
चल रहे प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने कहा है कि आप चाहें, तो नयी स्कीम में एक अप्रैल से आ सकते हैं या आप पुरानी स्कीम के हिसाब से 12 फीसदी टैक्स देकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना चाहते हैं, तो वह भी रास्ता खुला हुआ है. अत: यह प्रोजेक्ट वाइज बिल्डर्स को डिसाइड करना है कि वे किस स्कीम को अपनाते हैं.

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