चापाकल लगाने के बाद ही संवेदकों को भुगतान : महाचंद्र

पीएचइडी मंत्री ने माना चापाकल गाड़ने में हुई देरी पटना : बिहार विधान परिषद् की दूसरी पाली में विपक्ष ने चापाकल लगाने के मामले पर सरकार को घेरा. विधान पार्षद बाल्मीकि सिंह व सत्येंद्र नारायण सिंह के ध्यानाकर्षण पर पीएचइडी मंत्री डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह ने स्वीकार किया कि चापाकल लगाने में देरी हुई है. […]

पीएचइडी मंत्री ने माना चापाकल गाड़ने में हुई देरी

पटना : बिहार विधान परिषद् की दूसरी पाली में विपक्ष ने चापाकल लगाने के मामले पर सरकार को घेरा. विधान पार्षद बाल्मीकि सिंह व सत्येंद्र नारायण सिंह के ध्यानाकर्षण पर पीएचइडी मंत्री डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह ने स्वीकार किया कि चापाकल लगाने में देरी हुई है. 2013-14 वित्तीय वर्ष में सूबे में 55 हजार चापाकल लगाने थे,जबकि मात्र छह हजार चापाकल ही लगे हैं.

पीएचइडी मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 30 जुलाई तक वित्तीय वर्ष 2012-13 के चापाकल लगा दिया जाये. साथ ही अगले तीन महीने में वित्तीय वर्ष 2013-14 के बचे चापाकल भी लगा दिये जायेंगे. विधान पार्षदों के आग्रह पर उन्होंने निर्देश दिया कि चापाकल लगने के बाद और उसकी सूची विभाग को सौंपने के बाद ही संवेदकों को उनके वेतन का भुगतान किया जायेगा. विधान पार्षद बाल्मीकि सिंह के प्रश्न पर डॉ सिंह ने कहा कि 2012-13 में उन्होंने पटना पश्चिमी में 87 चापाकल लगाने की अनुशंसा की थी. इनमें 35 लगाये जा चुके हैं, जबकि बाकी पर काम जारी है. वहीं,पटना पूर्वी में सत्येंद्र नारायण सिंह ने 80 चापाकल लगाने की अनुशंसा की. इनमें 47 का काम पूरा हो गया है.

आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया में और तेजी जायेगी और बैकलॉग को पूरा किया जायेगा. मंत्री के जवाब के बाद विधान पार्षद सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मामला लंबित है फिर भी उसी संवेदक व इंजीनियर को ठेका दिया जाता है. ऐसे में अगर वे किसी वित्तीय वर्ष में काम पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें काली सूची में डाल देनी चाहिए.

विधान पार्षद केदार पांडेय ने भी कहा जिस गति से चापाकल लगना चाहिए, उस गति से नहीं लग रहा है. विधायक व विधान पार्षदों की अनुशंसा पर भी भेदभाव होता है. उसे दूर करना चाहिए.

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