पटना : पूर्व मानव संसाधन राज्य मंत्री व रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार 13 प्वाइंट रोस्टर को खत्म करने के लिए जो अध्यादेश लायी है वह जनता के दबाव में लाया गया है.
यह आंखों में धूल झोंकने वाला है. प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर दलित 15, आदिवासी 7.5 और पिछड़ों की संख्या 27 फीसदी होने चाहिए.
अध्यादेश में प्रोफेसर-एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आरक्षण नहीं है, उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि पीएम के आगे उस समय केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में मैं बेबस था, इसलिए पत्र लिखने के अलावा कुछ नहीं कर पाया.
सवर्ण को 10 फीसदी आरक्षण से आरक्षण का बैरियर टूट ही गया है, तो दलितों, पिछड़ों-अतिपिछड़ों को आबादी के हिसाब से आरक्षण कर देना चाहिए.
