अमीर-गरीब, सबको आगे बढ़ने का हक

पटना: लोगों की मानसिकता में बदलाव लाये बिना समावेशी शिक्षा संभव नहीं है. इसके लिए वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है कि हम सब एक हैं. गरीब हो या अमीर या फिर किसी भी जाति का, सभी को आगे बढ़ने का अधिकार है. ये बातें मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ‘बिहार में समावेशी शिक्षा व […]

पटना: लोगों की मानसिकता में बदलाव लाये बिना समावेशी शिक्षा संभव नहीं है. इसके लिए वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है कि हम सब एक हैं. गरीब हो या अमीर या फिर किसी भी जाति का, सभी को आगे बढ़ने का अधिकार है.

ये बातें मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ‘बिहार में समावेशी शिक्षा व सामाजिक विविधता’ पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार को संबोधित करते हुए कहीं. देशकाल सोसाइटी व पैक्स के सहयोग से एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान में आयोजित सेमिनार का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, उसका अनुपालन समाज व संस्था के लोग कर सकते हैं.

मौके पर मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों के शैक्षणिक परिभ्रमण के लिए राशि बढ़ा कर 20 हजार रुपये करने की घोषणा की. मुख्यमंत्री ने कहा, कहने को हम वैज्ञानिक युग में हैं, अंतरिक्ष में भी जा रहे हैं, लेकिन समाज में आज भी ऐसा तबका है, जो सोचता है कि उनका जन्म सिर्फ कमाने-खाने और शोषण सहने के लिए हुआ है. आज लोग साक्षर तो हो रहे हैं, लेकिन मानवीय मूल्यों, भातृत्व, करुणा, सहिष्णुता व राष्ट्रीयता की भावना घटती जा रही है.

इसके कारण समाज व जाति के बीच खाई उत्पन्न हो रही है. इसे दूर करने के लिए समाज में वातावरण बनाने में संस्थाओं का अनुभव काम आयेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूली बच्चों की पोशाक सामान्यत: एक होनी चाहिए. इससे यह नहीं पता चलेगा कि कौन बच्च किस जाति का है. निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में बच्चों को दुनिया के बारे ज्यादा जानकारी नहीं दी जाती है. सीएम ने कहा, अगर सर्वे हो या फिर जांच हो, तो पता चलेगा कि टीबी से मरनेवाले लोगों में करीब 60 फीसदी दलित-महादलित के लोग हैं. वहीं, इनकी औसत आयु भी 40-55 के बीच की रह गयी है. ये हार्ड वर्क करते हैं, जिसके कारण इन्हें मद्यपान की जरूरत होती है, लेकिन इन्हें इसका इस्तेमाल दवा के रूप में करना चाहिए. अगर ब्रॉड सेंस में काम होगा, तो निश्चित रूप से समावेशी विकास होगा. प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को पांच से दस हजार सैलरी मिलती है. अगर उनके विषय में रिजल्ट खराब हुआ, तो उन्हें हटा दिया जाता है. लेकिन, सरकारी स्कूल में वेतन अधिक है, फिर भी पढ़ाने में शिक्षक ध्यान नहीं देते.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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