पटना : बिहार के छह हजार चिमनियों में सितंबर से जिग-जैग तकनीक से ईंट बनेगा. इस तकनीक के प्रयोग से भट्ठों से निकलने वाला धुआं काफी कम मात्रा में निकलेगा और प्रदूषण पर रोक लगेगी साथ ही ईंट की कीमतों में भी गिरावट अायेगी. बिहार सरकार छह माह के भीतर बैठक कर जल्द ही केंद्र सरकार की कोयला नीति के अनुसार चिमनियों तक सरकारी रेट पर बिना मिलावट वाली मारगेट कोयला पहुंचायेगी. इससे ईंट बनाने में लागत कम होगी और कम कीमत में ईंटें मिलेंगी.
क्या है मारगेट कोयला और उसके फायदे : बिहार की चिमनियों तक पहुंच रहा कोयला मिलावटी है और उसकी कीमत 16 हजार रुपये टन तक है.
यह कोयला ग्रेड 4 क्वालिटी का है, जिसमें कोयला के साथ पत्थर की मात्रा होती है. जब यह कोयला चिमनी में जलाया जाता है, तो इससे धुआं अधिक निकलता है. अब मारगेट कोयला (बिना मिलावट का) भारत सरकार की कोयला नीति के मुताबिक बिहार सरकार चिमनी के मालिकों को देगी. इसकी कीमत छह हजार टन तक होगी और जब यह जलेगा तो इससे धुआं भी कम निकलेगा.
