पटना : आठ माह में लक्ष्य के एक चौथाई मकान ही टैक्स के दायरे में आये

अपर नगर आयुक्त ने एजेंसी को दी चेतावनी, लक्ष्य पूरा करें अन्यथा रद्द होगा एग्रीमेंट पटना : राजधानी यानी निगम क्षेत्र में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या चार लाख है. लेकिन, निगम के होल्डिंग टैक्स की दायरे में 2.08 लाख मकान ही है. इसमें भी निगम प्रशासन मात्र 50 से 55 हजार मकानों से ही टैक्स […]

अपर नगर आयुक्त ने एजेंसी को दी चेतावनी, लक्ष्य पूरा करें अन्यथा रद्द होगा एग्रीमेंट
पटना : राजधानी यानी निगम क्षेत्र में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या चार लाख है. लेकिन, निगम के होल्डिंग टैक्स की दायरे में 2.08 लाख मकान ही है. इसमें भी निगम प्रशासन मात्र 50 से 55 हजार मकानों से ही टैक्स की राशि वसूल कर रहा है. इससे निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही है. आलम यह था कि जनहित की योजना पूरा करना तो दूर निगमकर्मियों का वेतन भुगतान भी अनुदान राशि के भरोसे हो रहा है.
वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही नये मकानों को टैक्स के दायरे में लाने और टैक्स राशि वसूली की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को दी गयी. ताकि, निगम राजस्व को बढ़ायी जा सके. आलम यह है कि वित्तीय वर्ष के आठ माह खत्म होने के बाद भी लक्ष्य के सिर्फ एक चौथाई नये मकानों को ही टैक्स की दायरे में लाया जा सका है.
टैक्स के दायरे में लाना हैं एक लाख मकान : निगम प्रशासन ने चालू वित्तीय वर्ष में निजी एजेंसी को निर्देश दिया था कि कम-से-कम एक लाख नये मकानों को टैक्स के दायरे में लाना है. इसको लेकर अंचल स्तर पर टीम बनायी और नये मकानों को चिह्नित कर टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाये.
लेकिन, आठ माह खत्म होने पर निजी एजेंसी ने नूतन राजधानी अंचल में 13,722 मकान, बांकीपुर अंचल में 2353 मकान, कंकड़बाग अंचल में 5081 मकान और पटना सिटी अंचल में 4666 मकान को ही टैक्स की दायरे में लाया है. स्थिति यह है कि एक लाख नये मकानों में से सिर्फ 25,622 मकानों को ही टैक्स की दायरे में लाया गया है. इन नये मकानों से टैक्स के रूप में 21.90 करोड़ रुपये की वसूली की गयी है.
50 प्रतिशत ही वसूली गयी टैक्स राशि
चालू वित्तीय वर्ष में निगम प्रशासन ने 110 करोड़ होल्डिंग टैक्स वसूलने का लक्ष्य निर्धारित किया. इस निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को दी गयी.
लेकिन, निजी एजेंसी भी निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप टैक्स की वसूली नहीं कर सकी है. स्थिति यह है कि अब तक सिर्फ 51.45 करोड़ रुपये की वसूली की गयी है. अपर नगर आयुक्त (राजस्व) आलोक कुमार ने निजी एजेंसी को सख्त निर्देश दिया कि चार माह का समय है. इस अवधि में निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लें, अन्यथा एग्रीमेंट रद्द करने की कार्रवाई की जायेगी.

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