पटना : कुपोषण से जंग में सरकार का फोकस अल्पसंख्यक बहुल प्रखंडों पर भी है. इसी वजह से इन प्रखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की व्यवस्था और सुदृढ़ करने को लेकर प्रयास शुरूहो गये हैं. दरअसल, सरकार अल्पसंख्यक बहुल प्रखंडोंमें आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराना चाहती है. अब समस्या भूमि की उपलब्धता है.
इसके लिए संबंधित जिलों से ब्योरा तलब किया गया है. मुख्य सचिव दीपक कुमार के स्तर से इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है. इसलिए समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय के पदाधिकारी भी कोई चांस नहीं लेना चाहते. आईसीडीएस के निदेशक ने जिला ग्राम पदाधिकारियों को इस बाबत पत्र भी जारी कर दिया है.
प्रदेश के 20 जिलों में 75 अल्पसंख्यक बहुल प्रखंड : प्रदेश के 20 जिलों में 75 अल्पसंख्यक बहुल प्रखंडों में 85 बाल विकास परियोजना कार्यालय संचालित हैं. इन प्रखंडों में कुल 18971 अतिरिक्त आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं.
इन जिलों में सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए भवन निर्माण कराना चाहती है. इसी की कवायदशुरू हुई है. सूत्रों की मानें तो 14 दिसंबर को मुख्य सचिव दीपक कुमार के यहां इसको लेकर बैठक भी रखी गयी थी.
अल्पसंख्यक बहुल जिले
अररिया, बांका, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, वैशाली व पश्चिम चंपारण.
